कर्म ही उच्चतम मार्ग की ओर ले जाते हैं : योगेंद्र याज्ञिक

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  • आर्य समाज सेक्टर 19 के वार्षिक उत्सव पर पारिवारिक सत्संग कार्यक्रम

फरीदाबाद : व्यक्ति के कर्म ही उच्चतम मार्ग की ओर ले जाते हैं। इसलिए जो कर्म पुण्यवान बनाएं, दयावान बनाएं ऐसे कार्य मनुष्य को करने चाहिए। यह बात आर्य समाज सेक्टर 19 के वार्षिक उत्सव के दौरान चल रहे पारिवारिक सत्संग कार्यक्रम में राजेंद्र पाल बत्रा, अशोक आर्य, रविंद्र कुमार तनेजा तथा डॉक्टर ओम प्रकाश वधवा द्वारा महावीर नगर स्थित महावीर मंदिर में डॉक्टर योगेंद्र याज्ञिक (होशंगाबाद) ने लोगों को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि जीवन की कमाई को दूसरों के लिए समर्पित करने वाले व्यक्ति देवत्व प्रवृत्ति के होते हैं ।डॉक्टर याज्ञिक लोगों को देवत्व, असुर, पिशाच जैसी प्रवृत्ति के लोगों की व्याख्या कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की आत्मा सत्य और असत्य को जानती है, लेकिन व्यक्ति स्वार्थ वश सत्य को छोड़ असत्य की ओर चल पड़ता है। जिसके कारण जीवन में अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि हमें कोई भी कार्य करने से पूर्व चिंतन करने की आवश्यकता है और चिंतन में सकारात्मक चिंतन से व्यक्ति को देवत्व की प्राप्ति होती है इसीलिए समाज में लोगों को अच्छा और बुरा भी कहा जाता है। इससे पूर्व भजन उपदेशक दिनेश पथिक ने अनेक भजन सुना कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर समाज के प्रधान डॉक्टर गजराज सिंह आर्य ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से समाज को एकजुटता और सकारात्मक सोच मिलती है।

उन्होंने कहा कि आर्य समाज का एक ही सिद्धांत है कि वे दिखावा और आडंबर के खिलाफ लोगों को जागरूक करें ताकि लोग भ्रमित ना हो। कार्यक्रम है देवेंद्र शास्त्री, अशोक आर्य, विमला ग्रोवर, शांता अग्रवाल, महेश अग्रवाल, सरला सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

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