फरीदाबाद के गांव पाली के वृद्धाश्रम में दिल से मिले दिल, कर लिया विवाह

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  • आश्रम के संस्थापक प्रणब शुक्ला ने बुजुर्गों के घर बसाने में की मदद
  • वृद्धाश्रम के मंदिर में संपन्न कराया गया विवाह
  • गांव पाली में चल रहा है वृद्धाश्रम

फरीदाबाद : वृद्धाश्रम की डाइनिंग टेबल पर खाना खाते-खाते दोनों वरिष्ठ नागरिकों के दिल ऐसे मिले कि जीवन भर साथ निभाने का वादा कर लिया और फिर बंध गए वैवाहिक बंधन में। दोनों ने 13 अक्टूबर को विवाह किया और इसी दिन दोनों ने एक दूसरे के लिए करवा चौथ का व्रत भी रखा। यहां बात की जा रही है वृद्ध आश्रम में रह रहे 68 वर्षीय सविता और 62 वर्षीय विजय खुराना की, जो फरीदाबाद के गांव पाली के श्री अनादि सेवा प्रकल्प आश्रम में रह रहे हैं। परिवार से अकेले होने के कारण सहारे के लिए वृद्धाश्रम आए थे और अब एक-दूसरे का सहारा बन गए हैं। वृद्ध आश्रम के संस्थापक प्रणव शुक्ला की के सहयोग से पंडित आचार्य अरुण कुमार ने इनका विवाह संपन्न कराया। इनके विवाह के कार्यक्रम में श्री अनादि सेवा प्रकल्प आश्रम के संस्थापक प्रणव शुक्ला के साथ वृद्धाश्रम के कई बुजुर्ग सम्मलित हुए।

आपको बता दें कि सविता इस आश्रम में करीब दो महीने पहले आईं थीं। मुंबई की मूल निवासी सविता के पति का करीब 10 वर्ष पहले निधन हो गया था। इनके कोई संतान नहीं है। जीवन परेशानियों भरा रहा, तो पति के निधन के बाद कई वर्षों तक मथुरा और गुरुग्राम के वृद्धाश्रम में सहारा मिला। बाद में इन्हें गांव पाली के वृद्धाश्रम के बारे में जानकारी मिलीं, तो यहां आ गईं।

सविता बताती हैं कि वृद्धाश्रम में डायनिंग टेबल पर सब लोग मिल-जुलकर खाना खाते हैं। यहां विजय खुराना पहले से रह रहे थे। इस दौरान उनकी विजय खुराना से खाना खाते-खाते बातचीत होती रहती थी। एक-दूसरे के बारे में हाल-चाल लेने लगे। सविता का कहना है कि घर-परिवार से मैं अकेली थी और वो भी अकेले। जब कभी विजय बीमार होते थे, तो मैं कभी-कभी उनका हालचाल लेने को उनके पास बैठ जाती थी। वृद्धाश्रम में रहने वाले कई लोग इस पर आपत्ति जताने लगे थे। विजय के स्वभाव और विचारों से मैं प्रभावित थीं। मैंने उनके आगे अपने दिल की बात रखी और कहा कि अगर हम विवाह कर लें, तो एक, दूसरे को सहारा मिल जाएगा। लोगों की बातों से भी बच जाएंगे। उन्होंने हामी भर दी। इसके बाद हम दोनों ने वृद्धाश्रम के संस्थापक प्रणव शुक्ला के आगे अपने दिल की बात रखी। इसके बाद हमने वृद्धाश्रम के मंदिर में विवाह कर लिया।

विवाह बंधन में बंधने के बाद विजय खुराना ने कहा कि उनकी जब कभी तबीयत खराब होती थी, तो सविता हालचाल लेने आती थी। मुझे अच्छा लगता था। मैंने सोचा कि एक जीवन साथी के रूप में
सविता को अपना लेना चाहिए। इसलिए मैंने विवाह कर लिया। मूल रूप से हिसार के रहने वाले विजय लगभग 25 वर्ष पहले किन्हीं कारणों से पत्नी से अलग हो गए थे। काम के सिलसिले में पहले कई वर्ष दिल्ली में रहे। अब दो वर्षों से वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। प्रणव शुक्ला कहते हैं कि वृद्धाश्रम में 21 पुरुष और 16 महिलाएं हैं। वृद्धाश्रम में इस तरह से रह रहे बुजुर्गों के विवाह का पहला मामला है।

संस्थापक प्रणव शुक्ला कहते हैं कि वृद्धाश्रम में घर जैसा माहौल् है। वरिष्ठ नागरिकों के रहने खाने-पीने और स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी उन पर है पुण्य कार्य करके उनके मन को बड़ा अच्छा लगता है!

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