जीवन में सफलता हेतु अपनाएं 10 सूत्र : स्वामी मोक्षमृता चैतन्य

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फ़रीदाबाद, 22 दिसंबर। अमृता हॉस्पिटल परिसर में माता अमृतनंदमयी मठ द्वारा संचालित अमृता पाठशाला में पढ़ने वाले श्रमिक परिवार को बच्चों को सम्बोधित करते हुए अम्मा के परम शिष्य मोक्षमृता चैतन्य ने बच्चों को ढेर सारे उपहार दिए व प्रेरित करते हुए जीवन में सफलता पाने के लिए 10 नियमों के पालन करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा पूरी मेहनत से पढ़ाई करना, माता पिता की सेवा करना, देश से प्रेम करना, निर्बलो की सेवा करना, प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण, धर्म व संस्कृति पर विश्वास, बुरा नहीं बोलना, बुरा नहीं सुनना, बुरा नहीं देख़ना व बुरा नहीं करना वे सूत्र हैं, जो आप सभी को सफलता के शिखर तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि विगत 22 वर्षों में उन्होंने देश के हर भाग में अम्मा की अनुकम्पा व प्रेरणा से सेवा कार्य किये हैं। यह सेवा हमें आनंद की अनुभूति देती है व इससे हम दूसरों का भला कर सकते हैं। उन्होंने बच्चों संग रोचक व आनंद दायी संवाद किये।

उनके द्वारा बच्चों को उनी टोपी, स्वेटर, पुस्तक, कपियाँ, मोज़े, चप्पल प्रदान की गयीं। बच्चों को स्वादिष्ट भोजन, बिस्कुट, टॉफी प्रदान किया गया। पाठशाला में कार्यरत JSN टीम को भी उपहार दिए गए। खाने के लिए स्टील की प्लेट्स व अन्य पढ़ाई के उपकरण स्वामी जी ने प्रदान किये।

बच्चों ने स्वामी जी द्वारा 10 सूत्रों को दुहराया व अपनाने का वचन दिया। कविता, गीत, पहाड़े व अन्य प्रेरक गुणों का प्रदर्शन बच्चों ने किया।

अमृता हॉस्पिटल के जी एम ऑपरेशन रघुनाथ पिल्लै, सेफ्टी प्रमुख इंजिनियर अरुण कुमार जैन व आयुध की युवा टीम ने कार्यक्रम में भाग लिया। जे एस एन टीम की पूनम, आरती, जयदेव की सराहना स्वामी ने की।

ज्ञाताव्य है कि अमृता हॉस्पिटल में कार्यरत श्रमिकों के 50 से अधिक बच्चों को अम्मा की कृपा से व स्वामी निजामृतानंद जी पुरी के आशीर्वाद से विगत डेढ़ वर्ष से फ्री शिक्षा, ड्रेस, भोजन व सर्वांगीण विकास हेतु सहायता व मार्गदर्शन का अभियान चल रहा है। इस सेवा कार्य में अमृता प्रोजेक्ट के ई. डी. सत्यानंद मिश्रा IAS, प्रधान सूचना आयुक्त, भारत सरकार (से. नि.), कर्नल गोपाल कृष्णन व संस्थान के अधिकारियों के सक्रिय योगदान हैं।

स्वामी ने सभी को आशीर्वाद दिया, इंजिनियर अरुण जैन ने स्वामी व सभी दान दाताओं का आभार व्यक्त किया। बच्चों के मन में उत्साह, उल्लास व आनंद स्पष्ट दिखायी दे रहा था, शून्य से शिखर तक पहुँचने को संकल्पित ये बच्चे बड़े श्रम व लगन से पढ़ाई करते हैं। पूनम, आरती व जगदेव को स्वामी ने पाठशाला हेतु समर्पित रहने के लिए आशीर्वाद दिया।

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