31 जनवरी गई तो कूड़े के ढ़ेर लगे वहीं के वहीं

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 5 फरवरी। गुरुग्राम नगर निगम से सफाई व्यवस्था संभाले नहीं संभल रही! पिछले तीन महीने से सरकार ने स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर लाखों रूपये के तो विज्ञापन लगवा दिए और सफाई के नाम पर धुंआधार प्रचार किया व झूठे तौर पर स्वच्छता रेंकिंग देते हुए कई अवार्ड दिए गये परंतु स्वच्छता सर्वेक्षण की तय की गई आखिरी तारीख 31 जनवरी के बाद गली मौहल्लों में कूड़े कर्कट के ढ़ेर फिर दोबारा से लगने लगे! सफाई व्यवस्था के बारे में तो अब ऐसा लगने लगा कि बड़ी मजबूरी में ही नगर निगम सफाई व्यवस्था को सुचारु रूप में करवाता है और रोजमर्रा की सफाई व्यवस्था करवाने के लिए गुरुग्राम नगर निगम अब अपने ऊपर एक बड़ा भारी बोझ मानने लगा! गुरुग्राम की सफाई व्यवस्था को सुचारु रूप से जारी रखवाने के लिए तो अब लगता है कि पत्रकारों व सामाजिक संस्थाओं को ही बीड़ा उठाना पड़ेगा क्यों कि नगर निगम अधिकारीयों व मेयर तथा पार्षदों को तो एक दूसरे पर आरोप लगाने से ही फुर्सत नहीं है और विधायक महोदय तो केवल अपने अभी तक सम्मान समारोह करवाने में ही व्यस्त रहते हैं गुरुग्राम की सभी आरडब्लूए व पार्षद भी अब आपसी झगड़ों में उलझ चुके हैं तो फिर सफाई व्यवस्था का जिम्मेवार कौन होगा? यह एक गंभीर समस्या है!

गुरुग्राम के जैकबपुरा में कृष्ण मंदिर की गली में एक खाली प्लाट पर बनाये गए कूड़े के स्थान पर से 31 जनवरी से पहले तो पत्रकारों की खबरों की वजह से कूड़ा उठा लिया जाता था परंतु अब जैसे ही स्वच्छता सर्वेक्षण की तारीख 31 जनवरी गई तो फिर दोबारा से कूड़े के ढ़ेर वहीं के वहीँ लगने लगे! गुरुग्राम के दूसरे अन्य कुछ इलाकों से भी ऐसी खबरें आ रही हैं! सेक्टर 31 के दो पार्क गंदगी के प्रतीक बन चुके हैं! अब स्थानीय लोग इन पार्कों का उपयोग सैर करने के लिए नहीं करते! थोड़ी सी बारिश होने पर ही ये दोनों पार्क तालाब बन जाते हैं! स्थानीय लोगों का कहना है कि बार बार शिकायत करने के बावजूद भी प्रशासन के द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा! इसी प्रकार मानेसर में दिल्ली जयपुर हाइवे के किनारे दोनों ओर कई जगह गंदगी के ढ़ेर लगे हुए हैं! आईएमटी चौक से एनएसजी कैंप तक लगने वाली मार्किट में सडक़ के साथ साथ दोनों तरफ गंदगी फैली हुई है! इसी प्रकार पटौदी से बड़ी भारी शिकायतें मिल रही हैं कि वहां के नगर पालिका के द्वारा संचालित सभी शौचालय बहुत गंदे हैं व उन शौचालयों की सफाई व्यवस्था का कोई भी इंतजाम नहीं किया गया! हरियाणा सरकार पर अब एक सवालिया निशान लगता है कि पिछले तीन महीने से स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर जो पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा था आखिर वो किन लोगों की जेबों में चला गया! सफाई व्यवस्था तो हुई नहीं और सफाई के नाम पर करोड़ों रूपये डकारे गये! सफाई के नाम पर किये गये इस महाघोटाले की गहरी जाँच की जानी चाहिए!

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