हजारों गायों की बलि पर टिकी है हरियाणा सरकार !

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 8 फरवरी। हरियाणा प्रदेश दूध दही के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है! प्रदेश के सभी गावों, कस्बों व शहरों में दूध दही के लिए गाय के दूध को सबसे ज्यादा प्रोटीन युक्त,सात्विक व पवित्र माना गया है तथा हरियाणा प्रदेश ही एक ऐसा प्रदेश है जहां पर हर देहात, कस्बे व शहरों में हर घर से रोजाना गाय के लिए एक रोटी निकाली जाती है! प्रदेश के किसानों की खेती भी गाय व बैल पर आज भी निर्भर है परंतु ठीक इस के विपरीत हरियाणा में प्रदेश की भाजपा सरकार के तहत ही गौशालाओं में हजारों गायें भूख,प्यास और ठंड से मरती हैं और उनकी कोई भी सूचना इन गौशालाओं के प्रबंधकों के द्वारा ना दी जा रही हो और ऐसी सूचना की जानकारी प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारीयों के पास भी उपलब्ध ना हो तो यह हमारी गाय माता के साथ एक बहुत बड़ा जुल्म है!

प्रदेश की अधिकांश गौशालाओं में गायों का प्रबंधन ठीक नहीं है! दुधारू गायों के अलावा जो गायें बूढ़ी व बीमार होती हैं उन को भूख, प्यास व ठंड से मरने दिया जाता है तथा गायों की खाल उतार कर बेचने वाले तथाकथित हिंदू तस्करों से सांठगांठ कर के ये सभी गौशालाओं के प्रबंधकगण गाय माता की जबरदस्त दुर्गति कर रहे हैं!

हिंदू धर्म के ये तथाकथित ठेकेदार जरा सरकार को बतायें कि सिरसा की गौशालाओं में वर्ष 2017 से वर्ष 2018 के बीच के 16 महीनों के अंतराल में हुई 10 हजार 772 गायों की मौत के बाद उन 10772 गायों के शरीर को कैसे और कहां दफनाया गया? सभी हिंदू वेद शास्त्रों के अनुसार गायों की मृत्यु के बाद गायों को बड़े ही सम्मानजनक ढंग से जमीन में गहरे गड्डे खोद कर नमक व चूने को डाल कर दफनाया जाता है ताकि गायों की हड्डियां,खाल व मांस कुछ समय बाद नमक व चूने के मिश्रण से गलकर मिट्टी में मिल सके ताकि हिंदू धर्म की सब से पवित्र माने जाने वाली गायों की मृत्यु के बाद दुर्गति ना हो!

सिरसा जिले की गौशालाओं में मात्र 16 महीनों में हुई 10772 गायों की मौत पर लगे गहरे प्रश्नचिन्ह के साथ साथ यह भी एक बहुत बड़ा प्रश्न है कि सिरसा की इन गौशालाओं में 10772 इन मृत गायों के शरीर को सम्मानजनक तरीके से दफनाया गया या नहीं या इन 10772 मृत गायों के शरीर को हिंदू ठेकेदारों ने चीरफाड़ कर के इन की खाल,हड्डियां व अन्य अंग निकाल कर गाय माता की मौत के बाद बड़ी भारी दुर्गति की!

सिरसा की गौशालाओं में हुई इन 10772 गायों की मौत के बारे में जब सिरसा के भाजपा नेता प्रदीप रातुसरिया से पूछा गया तो उन्होंने इन गायों की मौत की जानकारी होने से मना किया व बताया कि सिरसा की एक गौशाला के प्रधान उन के भाई राजेंद्र रातुसरिया हैं उन से इस बारे में बात करें! जब राजेंद्र रातुसरिया से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन की गौशाला में ऐसी कोई घटना नहीं हुई और सिरसा के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इन्कम टैक्स वीरेंद्र सिंह यादव ने उन की गौशाला का दौरा कर के उन की गौशाला को प्रबंधन के लिए क्लीन चिट दी है! इसके बाद राजेंद्र रातुसरिया ने इस खबर के लेखक एवं पत्रकार मदन लाहौरिया के वट्सएप पर सिरसा के असिस्टेंट कमिश्नर इन्कम टैक्स के द्वारा उन की गौशाला को दी गई क्लीन चिट की हाथ लिखित हस्ताक्षर युक्त पर्ची की कॉपी भेज दी जो कि इस खबर के साथ फोटो के तौर पर लगाई जा रही है!

सिरसा के असिस्टेंट कमिश्नर इन्कम टैक्स वीरेंद्र सिंह यादव से इस बारे में संपर्क करने का प्रयास किया गया परंतु संपर्क नहीं हो पाया! यह एक गंभीर मसला है क्यों कि सिरसा की राजेंद्र रातुसरिया के नेतृत्व वाली गौशाला में असिस्टेंट कमिश्नर इन्कम टैक्स के द्वारा दौरा करना व उनके द्वारा इस गौशाला को प्रबंधन के लिए क्लीन चिट देना दोनों ही बात शक के दायरे में इस गौशाला को खड़ा करती है क्यों कि कोई आयकर से संबंधित मामला हो तो उस में तो एक असिस्टेंट कमिश्नर इन्कम टैक्स के द्वारा क्लीन चिट देना उचित माना जाता परंतु गायों के प्रबंधन को ले कर तो पशु विशेषज्ञ व डॉक्टर ही क्लीन चिट दे सकते हैं! इससे तो लगता है कि इसी गौशाला में पहले प्रबंधन की कमी की वजह से ही 16 महीनों के अंतराल काफी गायों की मौत हुई है और अब उन गायों की हुई मौतों पर पर्दा डालते हुए लीपापोती की जा रही है! यह एक गहरी जांच का विषय है! सिरसा की गौशालाओं में 10772 गायों की हुई मौत के बारे में जरा अब विस्तार से पढ़ें!

सिरसा जिले की गौशालाओं में बीते सवा साल में 10 हजार 772 गायों की मौत के खुलासे से प्रदेश में हडक़ंप मचा हुआ है! हैरानी की बात है कि अधिकतर गौशालाओं के प्रबंधकों के पास रिकॉर्ड ही नहीं है कि कितने गौ वंश की मौत हर साल हो रही है! पानीपत निवासी आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर गौ सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि यह विडंबना ही है कि सरकार के पास गौशालाओं में मरे गौवंश,बेसहारा गौवंश की संख्या,जिला स्तरीय स्ट्रे कैटल की कमेटियों द्वारा बनाये गये एक्शन प्लान, गौ रक्षकों की कुल संख्या, पकड़े जाने वाले लावारिस पशुओं की जानकारी ही नहीं है! पानीपत के सूचना अधिकार प्रहरी पी.पी. कपूर ने बताया कि 5 सितंबर 2019 को गौ सेवा आयोग को आरटीआई लगा कर प्रदेश की सभी गौशालाओं में मरे हुए गौवंश की संख्या, लावारिस गौवंश की संख्या, जिला स्तरीय स्ट्रे कैटल की कमेटियों द्वारा बनाये गये एक्शन प्लान, गौ रक्षकों की कुल संख्या, शेष पकड़े जाने वाले आवारा पशुओं की संख्या की सूचना मांगी गई थी! लेकिन हरियाणा गौ सेवा आयोग ने बिना कोई ठोस सूचना दिये आवेदन पत्र को महानिदेशक पशुपालन, सभी अतिरिक्त उपायुक्तों, सभी शहरी स्थानीय निकायों आदि को भेज कर अपना पल्ला छाड़ लिया!

कपूर ने बताया कि सघन पशुधन विकास परियोजना सिरसा के उपनिदेशक ने अपने 18 अक्टूबर 2019 के पत्र द्वारा जिला सिरसा की गौशालाओं में अप्रैल 2017 से जुलाई 2018 की अवधि में मरे गौवंश के चौंकाने वाले आंकड़े दिये हैं! इस के अनुसार इस अवधि में कुल 10772 गौवंश सिरसा के विभिन्न गौशालाओं में मरे! कपूर ने बताया कि दिनांक 7 अगस्त 2018 को नगराधीश व दिनांक 21 नवंबर 2018 को एडीसी सिरसा की अध्यक्षता में बेसहारा पशुकल्याण समिति की उच्चस्तरीय बैठकें भी हुई लेकिन इन दोनों बैठकों में बेसहारा गौवंश की इतनी भारी संख्या में हुई मौत के बारे कोई चर्चा तक नहीं की गई!

पशुपालन एवं डेयरी विभाग पानीपत के डिप्टी डायरेक्टर ने सूचित किया कि गौशाला प्रबंधकों के पास गौशालाओं में मरे गौवंश का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है! कपूर ने आरटीआई से मिले इन जवाबों पर आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार बेसहारा गौवंश की दयनीय हालात व आवारा पशुओं से जनता को हो रही परेशानी से आंखें मूंदे हुए है! सरकार को इतनी भारी संख्या में गौवंश के मरने की उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिये! सिरसा की इन गौशालाओं में 10772 गौवंश जिस में बूढ़ी गायें,बछड़े और सांडों को बगैर किसी बुनियादी सुविधा के मरने के लिए छोड़ दिया गया था! एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार सिरसा जिले में 118 गौशालाएं हैं जिनमें 45 हजार 280 गौवंश हैं!

हरियाणा सरकार के अनुसार मृत पशुओं का चमड़ा उतारने वालों के लिए पंजीकरण अनिवार्य है! यहां पर एक गहरा सवाल खड़ा होता है कि मृत पशुओं का चमड़ा उतारने के लिए किये गये प्रावधान में क्या मृत गायों का चमड़ा उतारने का प्रावधान भी किया गया है या बगैर किसी क़ानूनी प्रावधान के मृत गायों का चमड़ा भी इन्हीं ठेकेदारों के द्वारा उतारा जा रहा है जिन को और किसी भी प्रकार के पशु का चमड़ा उतारने का ठेका स्थानीय प्रशासन के द्वारा दिया गया हो! यहां एक सवाल और भी खड़ा होता है कि स्थानीय प्रशासन के द्वारा नियुक्त किये गए ये पशुओं का चमड़ा उतारने वाले सभी ठेकेदार हिंदू धर्म से ही हैं और हिंदू होते हुए ये ठेकेदार यदि मृत गायों को दफनाने की बजाय इन को चीरफाड़ कर के इन का चमड़ा उतारते हैं तो यह एक बहुत संगीन अपराध है और सख्त से सख्त दंडनीय है!

राज्य सूचना आयुक्त जय सिंह बिश्नोई ने प्रदेश के सभी जिलों की गौशालाओं के द्वारा मरे हुए गौवंश की आरटीआई एक्ट में सूचना नहीं देने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए प्रदेश के सभी 22 जिलों के एडीसी को नोटिस भेज कर 3 फरवरी को तलब किया था परंतु 3 फरवरी को आयोग में हाजिर ना होने व समय पर सूचना ना देने के मामले में इन सभी 22 जिलों के एडीसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया! केवल पानीपत, सोनीपत और जींद एडीसी कार्यालय से कर्मचारी ही पहुंचे जब कि शेष अन्य 19 जिलों से कर्मचारी भी नहीं आये! इस पर सूचना आयुक्त जय सिंह बिश्नोई ने सख्ती दिखाते हुए सभी जिलों के एडीसी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए आगामी सुनवाई के लिए 22 अप्रैल तारीख तय कर दी! इसके अलावा डायरेक्टर शहरी स्थानीय निकाय विभाग, डायरेक्टर पंचायती राज व गृह विभाग को मामले में हुई कार्यवाही के संबंध में सूचित किया गया!

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