स्वच्छ्ता में लापरवाही के लिए सरकार पूर्णतया जिम्मेवार

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 30 दिसंबर। स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारी के लिए गुरुग्राम में स्वच्छ्ता अभियान पर भिन्न भिन्न प्रकार के ड्रामे किये जा रहे हैं! हरियाणा सरकार तो गुरुग्राम के कूड़े कर्कट का प्रबंधन व कूड़े से बिजली बनाने का कार्य लगभग तीन साल पहले ईको ग्रीन कंपनी को दे कर गहरी नींद में सो गई और सरकार ने लापरवाही बरतते हुए बंधवाड़ी में 35 लाख टन कूड़ा इकठ्ठा होने दिया! कूड़े को अलग अलग करने की तीन साल तक कोई मशीन नहीं लगाई और अब कूड़े की समस्या ज्यादा होने के बाद जा कर आंख खुली हरियाणा सरकार की कि बंधवाड़ी प्लांट पर कूड़े के निस्तारण के लिए आधुनिक मशीनें लगाई जायें ताकि कूड़े का जल्दी से निस्तारण हो सके! कूड़े पर धंधा करने वाली कई एनजीओ गुरुग्राम में अचानक ही टपक गई और सरकारी अफसरों को उल्टा पाठ पढ़ा कर कूड़े कर्कट के लिए अलग अलग डस्टबिनों की योजना दे कर जनता को गुमराह करने का काम कर दिया!

आज गुरुग्राम की जनता की मुख्य समस्या कूड़े कर्कट की हालात जस की तस पड़ी है! आम साधारण जनता की मांग है कि हरियाणा सरकार ईको ग्रीन कंपनी पर दबाव बना कर बंधवाड़ी प्लांट के स्थान पर कूड़े कर्कट को अलग अलग करने व निस्तारण करने के लिए ज्यादा से ज्यादा संख्या में आधुनिक मशीनें लगवाये और साथ ही साथ गुरुग्राम शहर के सभी वार्डों का कूड़ा कचरा रोजाना पूरी तरह से उठवा कर बंधवाड़ी प्लांट पर भेजा जाये ताकि कूड़े कर्कट पे धंधा करने वाली किसी भी फर्जी एनजीओ को कूड़े के नाम पर गलत प्रचार व गलत राजनीति करने का मौका ना मिले!

पत्रकार हमेशा जनहित में खबरें लिखते हैं! आजकल कुछ नौसिखिये सलाहकार सोशल मिडिया पर अपने ग्रुप बना कर कूड़े कर्कट पर गंदी राजनीति करते हुए नगर निगम के अधिकारीयों व गुरुग्राम की जनता को गुमराह कर रहे हैं! ऐसे लोगों को तुरंत प्रभाव से रोका जाये! सफाई की पूरी व्यवस्था को सुचारु रूप से करना हरियाणा सरकार की जिम्मेवारी है और गलत सलाहकारों की वजह से जनता पर कूड़े कर्कट की गलत योजना ना थोपी जाये!

सेक्टर 23 ए की आरडब्लूए के प्रधान मलखान सिंह यादव जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि कूड़े कर्कट को अलग अलग करवाना सरकार की जिम्मेवारी है! सरकार की यह जिम्मेवारी आम साधारण जनता नहीं उठा सकती क्यों कि यहां के हर सेक्टरों में कर्मचारी वर्ग व मध्यम वर्ग के परिवार बसते हैं और वे अपने घरों से रोजी रोटी कमाने के लिए सुबह निकलते हैं व रात को घर लौटते हैं तो बताइये कि वे परिवार अपने घरों में कूड़े को अलग अलग कैसे करें और अधिकांश घरों में रोजाना कूड़ा मात्र दो से तीन किलो ही निकलता है तो उन अक्ल के अंधें नौसिखिये सलाहकारों से पूछा जाये कि क्या अब घरों में अलग अलग डस्टबिन लागू करने के साथ साथ कूड़े उठाने वाली रेहडिय़ों व डंपर जैसे बड़े वाहनों में भी कूड़े के अलग अलग हिस्से बनेंगे! मलखान सिंह यादव ने कूड़े की समस्या पर सीधे तौर पर बताया कि बंधवाड़ी प्लांट के स्थान पर कूड़े को अलग अलग करने की ज्यादा मशीनें लगाई जायें ताकि कूड़े कर्कट की समस्या का स्थाई समाधान हो सके! दूसरी ओर जब मारुति उधोग कामगार यूनियन के महासचिव कुलदीप जांघू से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सफाई व्यवस्था की कोई भी योजना देश प्रदेश की आबादी व वहां के लोगों के सिस्टम तथा समाज की अनुरूपता व संभावनाओं के अनुसार ही सफल हो सकती है! उदाहरण के तौर पर भारत के किसी दूसरे प्रदेश व बाहर के किसी दूसरे देश की योजना यदि हरियाणा में लागू की जाये तो यह जरूरी नहीं है कि उसको जनता स्वीकार करे!

कुलदीप जांघू ने आगे कहा कि हमेशा सफाई व्यवस्था की योजना उसी शहर की सभी आम साधारण जनता की सहमति से बनाई जाये ना कि किन्ही नौसिखिये सलाहकारों की राय से! जनवादी सफाई कर्मचारी कल्याण संघ के सलाहकार राजेंद्र सरोहा से जब बात की गई तो उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि अभी तक गुरुग्राम शहर में कूड़े कर्कट के लगे हुए ढ़ेर पूरी तरह से उठाये नहीं गये और यहां की सडक़ों की हालात बदतर है व सीवर ओवरफ्लो तथा दूषित पेयजल की समस्या बरकरार है तो ऐसे में जनता सरकार की जिम्मेवारी अपने सिर पर कैसे ले?

राजेंद्र सरोहा ने कहा कि यदि कुछ नौसिखिये सलाहकारों को गुरुग्राम की सफाई व्यवस्था की वास्तव में ही इतनी चिंता है तो सब से पहले वो सभी नौसिखिये सलाहकार अपने हाथों में झाड़ू पकड़ कर रोजाना सडक़ों पर सफाई करें व कूड़े कर्कट को अलग अलग कर के अपने निजी वाहनों में बंधवाड़ी प्लांट पहुंचाये तो उन्हें पता लगेगा कि कथनी और करनी में कितना अंतर है! राजेंद्र सरोहा ने कहा कि कूड़े कर्कट को बंधवाड़ी प्लांट पर ही आधुनिक मशीनें ज्यादा से ज्यादा संख्या में लगा कर अलग अलग किया जाये क्यों कि शहर के डंपिंग स्थानों से कूड़ा अलग अलग छांट कर वाहनों में ले जाना संभव व व्यवहारिक नहीं है! हमेशा व्यवहारिक व संभव योजना ही सफल होती है!

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