सोनल गोयल ने कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

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फरीदाबाद 22, अक्टूबर। फरीदाबाद नगर निगम की आयुक्त सोनल गोयल ने अमृत योजना के तहत फरीदाबाद में चल रही चारों परियोजनाओं के तहत किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियांे  को दिए हैं। परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान निगमायुक्त ने कार्यों की धीमी गति पर असंतोष व्यक्त करते हुए इन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि अमृत योजना के तहत फरीदाबाद में 84.87 करोड़ रूपये व 156.93 करोड़ रूपये की दो परियोजनाएं सीवरेज से सम्बन्धित तथा 90.52 करोड़ रूपये जलापूर्ति योजना और 21.68 करोड़ रूपये की गंदे पानी की निकासी की योजना क्रियान्वित की जा रही है और निर्धारित समय सीमा के तहत इन परियोजनाओं को जून 2020 तक पूरा किया जाना है।

निग्मायुक्त सोनल गोयल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अतिरिक्त आयुक्त विक्रम, मुख्य अभियन्ता डी.आर भास्कर, अधीक्षण अभियन्ता बीरेन्द्र कर्दम, कार्यकारी अभियन्ता विजय ढाका, वाप्कोस कम्पनी की ओर से टीम लीडर आर.पी.गुप्ता के इलावा अभियन्ता अनिल मेहता, एस.के. अग्रवाल और परियोजनाओं से सम्बन्धित ठेकेदार विकास अग्रवाल, राजन गुप्ता और सुधाकर रेड्डी आदि भी उपस्थित थे। निग्मायुक्त ने बैठक में मिर्जापुर स्थित मैन पम्पिंग स्टेशन की वर्तमान क्षमता

50 एम.एल.डी. से बढ़ाकर 100 एम.एल.डी. करने का प्रस्ताव तैयार कर इसे वर्तमान एजेन्सी से ही करवाने और राज्य स्तरीय तकनीकी समिति से इस प्रस्ताव को स्वीकृत करवाने के निर्देश दिए। वन विभाग हरियाणा, वन विभाग उत्तर प्रदेश और सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश के साथ लंबित मामलों की देखरेख करने के निर्देश अतिरिक्त आयुक्त विक्रम को दिए। उत्तर प्रदेश सरकार को भूमि की कीमत अदा करने और तिलपत वायु स्टेशन के नजदीक बुढ़िया नाला की चैड़ाई से संबंधित मामले को राजस्व विभाग से कलेरिफाई करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए। अमृत योजना के तहत बनाए जा रहे/बनाए गए बूस्टर में जलापूर्ति के लिए नहर पार क्षेत्र में 25-30 टयूबवैल के लिए जगह चिन्हित करने के निर्देश निग्मायुक्त ने मुख्य अभियंता रमेश मदान को दिए। पलवल में जलापूर्ति योजना का कार्य कर रही मैसर्स केबीआर शिल्पा कंपनी ने पलवल की दरों पर ही फरीदाबाद में इस काम को करने की सहमति व्यक्त की।

निग्मायुक्त ने भारत सरकार की नीति के अनुसार अमृत योजना के तहत कूड़े का उपचार (बायो रिमिडियेशन) परियोजना का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये जिसके लिए वांछित राशि का भुगतान केन्द्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

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