सार्वजनिक शौचालय बने आरामगाह !

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 24 सितंबर। गुरुग्राम के सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ वाले इलाके सदर बाजार के पास व जैन बिरादरी के पास तथा राजकीय वरिष्ठ कन्या विद्यालय की दीवार के साथ निगम द्वारा बनाए गए सार्वजनिक शौचालय में सफाई कर्मचारी एक चारपाई व तख्त लगाकर आराम करते हैं! इस सार्वजनिक शौचालय की देखरेख करने वाला ठेकेदार जो निगम की तरफ से नियुक्त है, इस मामले को लेकर पूर्णतया लापरवाह है! इस शौचालय में एक सफाई कर्मचारी शराब पीकर बैठता है व जमीन पर चटाई बिछाकर सो जाता है व लोगों को गंदी गालियां भी देता है!

इस शौचालय में पिछले कई दिनों से पानी की सप्लाई जानबूझकर रोक दी गई थी! जिस वजह से शौचालय में भारी बदबू व गंदगी फैली होने की वजह से यहां पर लोगों को काफी तकलीफ उठानी पड़ी! सफाई कर्मचारी जानबूझ कर सप्ताह में एक या दो दिन इस शौचालय को बंद कर देते हैं और इन सफाई कर्मचारियों ने इस शौचालय के दरवाजे को भी तोड़ रखा है! गुरुग्राम में इस शौचालय के अलावा और भी कई सार्वजनिक शौचालयों के गेट पर ताला जड़ा हुआ है! निगम के अधिकारी जानबूझकर आँख बंद करके बैठे हैं! गुरुग्राम जैसे शहर में गंदगी व कूड़े के ढेरों का जगह-जगह आलम लगा हुआ है! गुरुग्राम में नगर निगम द्वारा डोर टू डोर कचरा कलेक्शन नहीं किया जा रहा! पिछले काफी दिनों से यहाँ के गली मौहल्लों में कचरा लेने वाली गाडिय़ां नहीं आ रहीं!

गुरुग्राम शहर के इन मौहल्ला वासियों से जब बात की गई तो मालुम हुआ कि विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सत्तासीन भाजपा सरकार के कुछ तथाकथित नेताओं ने ही निगम अधिकारियों को कचरा ना उठाने के आदेश दे रखे हैं व राजनैतिक लाभ लेने के लिये कुछ तथाकथित भाजपा नेता कूड़ा-कर्कट व गंदगी साफ करवाने के लिए ड्रामा करते हुए अपने ही निजी वालयिंटर भेजते हैं! यहाँ की जनता को अब पूरा-पूरा शक है कि गुरुग्राम के कुछ तथाकथित भाजपा नेता अब गंदगी में धंधा तलाशने लग गए हैं यानि कि निगम के सफाई कर्मचारियों को हटवा कर अपनी निजी सफाई कंपनियां बनाकर आने वाले समय में गुरुग्राम की सफाई व्यवस्था के ठेके लेने की जुगत भिड़ा रहे हैं! यह गुरुग्राम की जनता के साथ सरासर एक धोखा व साजिश है!

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One Reply to “सार्वजनिक शौचालय बने आरामगाह !”

  1. खबर बिल्कुल सही है। मैं स्वयं अनेकों बार बन्द पड़े शौचालयों को देखकर यही सोचने पर मजबूर होता रहा हूँ कि गुड़गांव प्रशासन की आंख के नीचे इन शौचालयों को बन्द ही रखना था तो जनता के पैसे की बर्बादी क्यों की गई।

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