शिक्षा के निजीकरण एवं व्यापारीकरण की नीति पर रोक लगाई जाए : प्रोफेसर दिनेश ऑबराल

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नई दिल्ली (मदन लाहौरिया) 24 नवंबर। शिक्षा के निजीकरण एवं व्यापारीकरण के खिलाफ एक विशाल विरोध प्रदर्शन मार्च नई दिल्ली मंडी हॉउस से संसद मार्ग तक निकाला गया जिसमें लगभग दस हजार के करीब लोगों ने भाग लिया! देश के कोने-कोने से आये हुए तकरीबन 27 संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हजारों की संख्या में इस विशाल विरोध प्रदर्शन मार्च में भाग लिया! इस विरोध मार्च में देश के अनेकों विश्वविद्यालयों के हजारों छात्रों व अध्यापकों ने भी बढ़ चढक़र भाग लिया! पूरे देश में इस वक्त शिक्षा का निजीकरण व व्यापारीकरण करने के खिलाफ एक जबरदस्त माहौल बना हुआ है! वास्तव यह एक बहुत गंभीर मसला है! देश के बहुत से विश्वविद्यालय शिक्षा को एक ऊँचा आयाम देने में लगे हुए हैं! इन विश्वविद्यालयों में एक ऐसा विश्वविद्यालय जेएनयू है जहां से पढ़ कर हजारों विद्वान एवं प्रतिभाशाली शख्सियतें देश के हर कोने में अपने-अपने क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं! उसी विश्वविद्यालय जेएनयू के खिलाफ पिछले पांच वर्षों से एक जबरदस्त राजनैतिक साजिशों का चक्रव्यूह बुना जा रहा है!

जेएनयू के छात्रों पर पिछले पांच सालों से ही राष्ट्र द्रोह जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने लगे हैं! उससे पहले जेएनयू के खिलाफ ऐसा माहौल कभी भी नहीं बनाया गया! इस विषय पर जरा गंभीरता से सोचने की जरूरत है! वर्ष 2014 में मोदी सरकार आने के बाद ही जेएनयू के छात्रों के खिलाफ ऐसा गंदा व नफऱत भरा माहौल देश में क्यों बनाया गया! कहीं ऐसा तो नहीं है कि आरएसएस व भाजपा के शीर्ष नेता इस विश्वविद्यालय का निजीकरण करके इसे किसी उच्च औद्योगिक घराने को सौंपना चाहते हों! यह बात तो धीरे-धीरे अब पूरे देश की जनता के सामने स्पष्ट होती जा रही है कि हमारे प्रधानमंत्री अपनी जिद्द में इस विश्वविधालय जेएनयू का भगवाकरण एवं निजीकरण करने के लिए जेएनयू के छात्रों पर एक गहरी साजिश के तहत अनर्गल आरोप लगाते रहते हैं! इसी साजिश के तहत जेएनयू में सभी प्रकार की फीसों का शुल्क महंगा किया गया ताकि मध्यम व गरीब परिवारों के छात्र जेएनयू छोड़ कर चले जाएं!

वर्ष 2014 में देश में जब मोदी सरकार सत्ता में आई तो भाजपा ने देश को एक सस्ती व अच्छी शिक्षा देने का वायदा किया था और पिछले पांच वर्षों में भाजपा ने देश को केवल नफऱत व घृणा की ही शिक्षा प्रदान की है! जब भाजपा लोकसभा में विपक्ष में होती थी तब तो सस्ती शिक्षा के लिए लोकसभा में खूब हंगामा इनके द्वारा किया जाता था परंतु जब अब पिछले पांच वर्षों से सत्ता में हैं तो शिक्षा को सस्ता करने का वायदा हो भूल गए और देश भर में अपनी ही पार्टी के धनवान नेताओं के सैंकड़ों की संख्या में निजी कालेज व विश्वविद्यालय खुलवा दिए! आज देश के हर नागरिक को सस्ती शिक्षा उपलब्ध करवाने की सख्त जरूरत है! जहां इस देश में एससी एसटी छात्रों की फीस माफ हो या बहुत ही कम फीस में पढऩे की सुविधा दी गई हो तो फिर वहां पर अन्य जातियों के आर्थिक कमजोर व गरीब छात्रों के साथ पढ़ाई के मामले में महंगी फीसें लागू करके नाइंसाफी क्यों की जा रही है! यह एक बहुत ही गंभीर मसला है!

इस सारे विषय में जब एक बहुत ही अनुभवी शिक्षाविद प्रोफेसर दिनेश ऑबराल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि शिक्षा के निजीकरण एवं व्यापारीकरण के खिलाफ करीब दस हजार लोगों ने नई दिल्ली मंडी हॉउस से संसद मार्ग तक विरोध प्रदर्शन मार्च निकाल कर मोदी सरकार को एक प्रकार की चेतावनी दे दी है कि देश में अब शिक्षा के निजीकरण एवं व्यापारीकरण को रोका जाये वरना देश की जनता सस्ती शिक्षा पाने के लिए एक बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा करके सडक़ों पर उतरेगी! आगे उन्होंने कहा कि जेएनयू में की गई फीस वृद्धि गरीब छात्रों के साथ सरासर जुल्म है और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज तथा शिक्षा को महंगा कर निजी हाथों में सौंपने का घोर विरोध किया जाये व घोर निंदा की जाये! प्रोफेसर दिनेश ऑबराल ने आगे बताया कि जेएनयू देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है जहां देश के कोने-कोने से गरीब,आदिवासी व वंचित वर्ग के छात्र विश्वस्तरीय शिक्षा हासिल कर सकते हैं! अब मोदी सरकार शिक्षा को ही महंगा कर निजी हाथों में सौंप कर गरीबों के बच्चों को शिक्षा से दूर करने का काम कर रही है!

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