लक्ष्य की महिला कमांडरों की गिरफ़्तारी, संविधान का अपमान : लक्ष्य

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लखनऊ ! लक्ष्य की महिला कमांडरों जो हाथरस की घटना के विरोध में परिवर्तन चौक लखनऊ पर कैंडल मार्च के लिए गई थी और जिसकी सूचना दिनांक 30 सितम्बर को जिला अधिकारी व पुलिस कमिश्नर को दे दी गई थी इसके बावजूद लक्ष्य की महिला कमांडरों को  पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया । यह शासन प्रशासन की खुलमखुल्ला अंधेरगर्दी है तथा संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन है तथा यह लोकतंत्र कि हत्या है विशेष कर उत्तर प्रदेश में ।

लक्ष्य कमांडरों ने सरकार से प्रश्न करते हुए कहा कि क्या प्रदेश में देश का संविधान लागू नहीं है, क्या प्रदेश में मनुस्मृति लागू हो गई जिसमें किसी भी बहुजन समाज के लोगों को व  महिलाओं को कुछ भी बोलने की आजादी नहीं है जवाब दें | उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि वे उन पुलिस अधिकारीयों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही करें जिन्होंने लक्ष्य की महिला कमांडरों को गैरकानूनी तौर पर गिरफ्तार किया था और उनको उनके मौलिक अधिकारों से वंचित किया है ताकि समाज का सरकार पर विश्वास बना रहे |लक्ष्य के कमांडर बहुजन समाज के अधिकारों के लिए ऐसे ही संघर्ष करते रहेंगे वो किसी के सामने झुकने वाले नहीं है और वे इस आंदोलन को और मजबूत करेंगे । उन्होंने बहुजन समाज के लोगों से विशेषतौर से महिलाओं से आह्वान करते हुए कहा कि आओ मिलकर इस मनुवादी सोच के खिलाफ आवाज बुलंद करें |

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2 Replies to “लक्ष्य की महिला कमांडरों की गिरफ़्तारी, संविधान का अपमान : लक्ष्य”

  1. बहुत ना इनसाफी है ए मनुवादी सरकार कुछ भी कर सकती है। इनके अन्दर इन्सानियत मर चुकी है।

  2. अंधेर नगरी बना रखा है उत्तर प्रदेश को, कनून व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है।

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