मुझे षड्यंत्रपूर्वक फंसाया गया : हरीश रावत

289 Views

देहरादून, 20 सितंबर ! स्टिंग मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय में पेश होने से एक दिन पहले उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरुवार को कहा कि उन्हें ‘षड्यंत्रपूर्वक’ फंसाया गया है । रावत ने कई ट्वीट करके अपनी व्यथा प्रकट करते हुए कहा, ‘मैं एक षड्यंत्र का शिकार हूं । षड़यंत्र मेरी सरकार को गिराने का भी हुआ है, जो स्टिंगकर्ता की स्वीकारोक्ति से स्पष्ट है। बकौल स्टिंगकर्ता, षड़यंत्रकारियों में से एक व्यक्ति का पुत्र मुख्यमंत्री आवास में रहकर सैटर (दलाल) का काम करता था।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे षड्यंत्रपूर्वक फंसाया गया व मेरी सरकार को बर्खास्त किया गया और अब मेरी आवाज को घोंटने के लिये सीबीआई पर एफआईआर दर्ज करने व मेरा उत्पीड़न करने का दबाव बनाया जा रहा है।’’ हाल में सीबीआई ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि वह जल्द ही इस मामले में रावत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करेगी ।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ दिन के उजाले की तरह यह स्पष्ट है कि वह रुपया देकर किसी विधायक की खरीद-फरोख्त नहीं कर रहे हैं जबकि हमारे राज्य में ऐसे कुछ स्टिंग सार्वजनिक हैं जिनमें सत्ता के निकटस्थ लोग सरकारी काम करवाने के एवज में भारी मात्रा में घूस स्वरूप रूपया मांग रहे हैं या ले रहे हैं।’’ रावत ने कहा कि सीबीआई द्वारा जांच में सहयोग नहीं करने या जांच से भागने की बात कही जा रही है और दुष्प्रचारित किया जाता है कि अमुक व्यक्ति के कई-कई जगह या कई देशों में खाते हैं और संपत्तियां हैं। उन्होंने कहा, ‘ मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मेरी सम्पत्ति और खाते, आयकर रिटर्न और चुनाव आयुक्त को दिये गये विवरण में साफ-साफ दर्शाये गये हैं। मैंने अपने पासपोर्ट को मुख्यमंत्री बनने के बाद रिनवल नहीं करवाया है।’’ उन्होंने कहा कि वह अपने कुल देवता व इष्ट देवता का नाम लेकर नैनीताल की ओर प्रस्थान कर रहे हैं जहां कल न्याय के मंदिर में उनकी याचिका पर सुनवाई होने की सम्भावना है।

अपने जीवन और स्वास्थ्य की कीमत पर भी उत्तराखण्ड की सेवा करने, गरीब व जरूरतमंद का दुःख बांटने की बात कहते हुए रावत ने यह भी कहा कि उन्हें न्यायालय के समान ही जनता-जनार्दन के न्याय पर भी विश्वास है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि आपको लगता है कि मुझे षड्यंत्र का शिकार बनाया गया है तो मेरे लिये यह प्रार्थना करें कि मैं भारत की न्याय व्यवस्था से न्याय प्राप्त करने में सफल होऊं।’ रावत ने यह भी कहा कि उनके पास न्यायालय का खर्चा उठाने की क्षमता नहीं है और वह अपने दोस्तों के सहारे ही न्यायलय के सम्मुख खड़े हैं ।

इस प्रकरण की तह तक जाने में न्यायालय की मदद करने की भगवान केदार से प्रार्थना करते हुए कांग्रेस नेता ने भरोसा जताया कि इस प्रसंग के निर्णय के बाद स्टिंग संस्कृति और स्टिंगबाजी के सहारे राजनीति करने वाले चेहरे बेपर्दा हो जायेंगे और उनको न्यायालय के सम्मुख अपराधी के तौर पर खड़ा होना पड़ेगा।

गौरतलब है कि वर्ष 2016 में हरीश रावत सरकार से 10 असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों के समर्थन वापस लेने के बाद विधानसभा में शक्तिपरीक्षण से पहले एक स्टिंग सामने आया था जिसमें रावत उनका समर्थन वापस पाने के लिये कथित तौर पर खरीद—फरोख्त करते दिखायी दे रहे थे ।

Spread the love