मटन चिकन एवं अंडे के कचरे की खुली पोल

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 6 जनवरी। अभी तक कूड़े कर्कट की समस्या को केवल प्लास्टिक व अन्य सामान का सूखा कूड़ा तथा सब्जियों एवं फल फ्रूट के गीले कूड़े तक माना जा रहा था! परंतु यह खबर पढ़ कर चौंकिये मत कि साइबर सिटी कहलाने वाले गुरुग्राम में रोजाना कई लाख अंडों का लोगों के द्वारा सेवन किया जा रहा है और इन कई लाख अंडों का कचरा हजारों किलो रोज का उसी सॉलिड वेस्ट में मिक्स हो कर बंधवाड़ी जाता है जो नगर निगम व ईको ग्रीन के सफाई कर्मचारी दूसरा कूड़ा उठा कर ले जाते हैं! इसी प्रकार रोजाना सैंकड़ों रेस्टोरेंटों व ढाबों तथा रेहडिय़ों पर सैंकड़ों किलो चिकन व मटन पकता है! चिकन व मटन की झूठन व बचे हुए अवशेष के कचरे को इसी मिक्स कूड़े में डाल दिया जाता है! चिकन मटन और अंडों के वेस्ट का हजारों किलो कचरा रोजाना बगैर अलग किये ही बंधवाड़ी प्लांट पर दूसरे कचरे के साथ मिक्स कर के भेज दिया जाता है!

अब बताइये जरा कि गुरुग्राम का प्रशासन तो बिलकुल ही गहरी नींद में सोया हुआ है क्यों कि उसे ये खबर ही नहीं कि खतरनाक बीमारियां देने वाला मीट,मांस,मटन,चिकन व अंडों का कचरा रोजाना बगैर सेग्रीगेशन के बंधवाड़ी प्लांट पहुंच रहा है जो कि भयंकर बीमारियां पैदा कर रहा है! नगर निगम व ईको ग्रीन के अधिकारी सभी सेक्टरों से निकलने वाले कूड़े का तो अभी तक सुचारु रूप से प्रबंधन कर नहीं पाये तो फिर इस खतरनाक मीट माँस के कचरे का प्रबंधन कैसे करेंगे? यह एक गंभीर सवाल है! ईकोग्रीन सफाई व्यवस्था में पूर्णतया फेल है! नगर निगम के पास मौजूदा हालातों में सुधार करने के लिये कोई ठोस कार्य योजना नहीं है! खानापूर्ति करते हुए निगम के अधिकारी सफाई के नाम पर केवल जागरूकता अभियान चलाने का ड्रामा ही कर रहे हैं! गुरुग्राम में करीब 206 करोड़ रूपये का बजट सालाना सफाई के नाम पर खर्च किया जाता है लेकिन निगम और ईकोग्रीन दोनों मिल कर भी शहर को स्वच्छ नहीं बना सके! पिछले पांच वर्षों में शहर में सफाई के नाम पर कूड़े कर्कट के ढेरों के रोजाना दर्शन हो जाते हैं! शहर की सडक़ों पर गहरे गड्ढे हैं जो हादसों का कारण बन रहे हैं! सार्वजनिक शौचालयों की बहुत बुरी हालात है!

गुरुग्राम में लगभग 500 से अधिक मीट मांस बेचने की दुकाने हैं जिन में केवल 100 के आस पास ही निगम से लाइसेंसशुदा हैं बाकि दुकाने अवैध रूप से हैं! मटन चिकन के लिए मीट तैयार करने के सैंकड़ों की संख्या में सलॉटर हॉउस अवैध रूप से हैं जिन में रोजाना हजारों की संख्या में बकरे,भेड़,सूअर व मुर्गे काटे जाते हैं! इन का वेस्ट व वेस्ट वाटर नगर निगम की सीवरेज प्रणाली में जा कर सीवर को बंद करने का काम करता है! जो सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बहरामपुर में लगा हुआ है उस में भी यह मीट मांस काटने वालों का वेस्ट वाटर जा कर मिलता है व गंभीर बिमारियों का कारण बनता है!

बकरे, भेड़, सूअर व मुर्गे को काटने से सलॉटर हॉउस में वेस्ट के तौर पर खाल, हड्डियां, लीवर, आंतडिय़ाँ, खून, फेफड़े, किडनी, घुटने, दांत, नाख़ून, पैर व सिर के हिस्से निकलते हैं जो मीट को मटन चिकन के रूप में पकाने में काम नहीं आते! पोल्ट्री हॉउस से मुर्गियों का वेस्ट निकलता है! मछली पकाने वाले ढाबों व रेस्टोरेंटों से भी वेस्ट बहुत निकलता है!

इस विषय पर रिसर्च करने के बाद पता लगा कि सलॉटर हॉउस में कटने वाले जानवरों का वजन के मुकाबले शरीर का लगभग 70 प्रतिशत सॉलिड वेस्ट होता है जिस में भेड़ व बकरे का 52 प्रतिशत, सूअर का 60 से 62 प्रतिशत व मुर्गे के चिकन में 68 से 72 प्रतिशत तक सॉलिड वेस्ट होता है!

जनवादी सफाई कर्मचारी कल्याण संघ के सलाहकार राजेंद्र सरोहा व मारुती कामगार यूनियन के महासचिव कुलदीप जांघू तथा सेक्टर 23 ए आरडब्लूए के प्रधान मलखान सिंह यादव व महासचिव भवानी शंकर व सिटीजन फॉर क्लीन एयर की सयोंजिका रुचिका सेठी इत्यादि इन तमाम लोगों ने नॉन वेज के कचरे के गंभीर विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वास्तव में यह एक गंभीर समस्या है व नॉन वेज के कचरे का पूर्ण रूप से अलग प्रबंधन करना चाहिए ताकि गंभीर बिमारियों से बचा जा सके! राजेंद्र सरोहा ने कहा कि सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए तो नॉन वेज के कचरे का अलग प्रबंधन करना बहुत जरूरी है क्यों कि दूसरे कचरे के साथ मिक्स हो कर मटन चिकन का कचरा भयंकर बिमारियों का कारण बन सकता है!

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