भारतीय संस्कृति में मातृ शक्ति की अग्रणीय भूमिका : स्वामी ज्ञानानंद

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वृंदावन 3 जनवरी : संपूर्ण विश्व में श्रीमद्भागवत गीता के प्रचार प्रसार एवं गीता के माध्यम से लोगोंं में जीवन जीने की प्रेरणा का उद्घोष करने वाले गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कृष्ण कृपा धाम में महिलाओं को गीता का उपहार भेंट करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति ने हमेशा मातृशक्ति को अग्रणी स्थान दिया है। हमारा यह कर्तव्य है कि हम इस गौरव को बनाए रखें। प्रत्येक सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में महिलाओं की प्रमुख भूमिका रहती है। हमें दूसरों के सद्गुणों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब नारी शक्ति में चेतना जागेगी, तभी समाज में सुधार होगा। महिलाओं को गीता के माध्यम से संपूर्ण भारतवर्ष में एक आदर्श स्थापित करना होगा। वह आश्रम में महिलाओं को गीता उपहार सम्मान कार्यक्रम में महिलाओं की समाज में भूमिका पर उद्बोधन दे रहे थे।

इस अवसर पर देवेंद्र शर्मा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के अंदर असीमित ऊर्जा है। हमें इस ऊर्जा का सकारात्मक कार्यों में प्रयोग करना है। हम ईष्र्या, द्वेष, आक्रोश आदि भावनाओं से उठकर सामाजिक व राष्ट्रीय निर्माण में सहयोगी बने। अनूप शर्मा ने कहा कि इतिहास में अनेक ऐसी नारी हुई हैं जिन्होंने अपने साहस व आत्मविश्वास से समाज में आदर्श स्थापित किए हैं। मातृशक्ति समूह का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रतिभा शर्मा ने कहा कि यह हम सभी बहनों के लिए सौभाग्य का अवसर है कि हमें पूज्य महाराज से गीता उपहार मिला है। उन्होंने कहा की महाराज जी महिला जेल एवं बाल सुधार के लिए जो बच्चे जेल में है उन्हें सही राह पर लाने के लिए प्रवचन दें, जिसे महाराज जी ने सहर्स स्वीकार किया।

इस अवसर पर डॉ सुनीता, डॉ. वर्तिका किशोर, पीहू विश्वास, अनामिका दीक्षित, मुदिता पाठक, राखी, सुलेखा अग्रवाल, विष्णु, प्रिया चौधरी, विष्णु दान शर्मा, वासुदेव शरण, केशव देव, सुमित शर्मा आदि उपस्थित थे। संचालन देवेंद्र शर्मा ने आभार प्रदर्शन संजय शर्मा ने किया।

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