फरीदाबाद : जीएसटी के पांच साल क्या है हाल

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वन नेशन वन टैक्स का नारा देकर के बहुत लंबे समय के बाद में एक टैक्स रिफॉम्र्स की शुरुआत जीएसटी के रूप में जुलाई 2017 से शुरू की गई।

इस व्यवस्था को लगे 5 साल होने जा रहा है, तमाम छोटी-बड़ी दिक्कतों के साथ अब इसमें काफी सुधार देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ तमाम टैक्स की दिक्कतों को कम किया गया है वहीं पर सरकार का रेवेन्यू भी बढ़ा लेकिन अभी भी छोटी-मोटी समस्याएं बनी हुई हैं। सरकार समय-समय पर मीटिंग करके कानून में बदलाव भी कर रही है। इन सारे विषयों पर विस्तृत रूप से टैक्स अधिकारी व्यापारी और टैक्स प्रोफेशनल से बातचीत कि हमारे वरिष्ठ संवाददाता सतपाल खत्री और मनीष शर्मा ने। विस्तारपूर्वक बातों का कुछ अंश इस प्रकार है।

जीएसटी बहुत ही महत्वपूर्ण कानून है आर्थिक एकीकरण के रूप में 2017 में शुरुआत हुई जहां व्यापारियों को तमाम टैक्स के झंझटों से छुटकारा मिला है वहीं पर सरकार का रेवेन्यू भी बढ़ा हम व्यापारी को चोर नहीं समझते हैं बल्कि नेशन बिल्डर के रूप में देखते हैं नियमित करदाताओं का हम सम्मान करते हैं।

  • राजेश कुमार, आईआरएस, एडिशनल कमिश्नर सीजीएसटी

जीएसटी इनडायरेक्ट टैक्स में एक बहुत बड़ा रिफॉर्म है इससे सारे व्यापारी भी लाभान्वित हो रहे हैं और उनका व्यवसाय करना काफी सरल हो गया है वही सरकार का रेवेन्यू बढ़ा है।

  • डॉ. सौरव बडाय़ा, भा.रा.से. उपायुक्त

जीएसटी कर प्रणाली भविष्य को ध्यान में रखकर के बनाई गई है इससे काफी हद तक टैक्स का सरलीकरण हो जाएगा हमारा डिपार्टमेंट हमेशा करदाताओं के प्रति जिम्मेदारी का निर्वहन करता है।

  • पुनीत शर्मा, डिप्टी एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर

वन नेशन वन टैक्स का जो नारा दिया गया था वह चरितार्थ हो रहा है। अलग-अलग स्टेट में टैक्स में अंतर होता था जिसके कारण प्रोफेशनल्स व व्यापारियों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
सरकार ने इसमें थोड़ी जल्दबाजी की है हालांकि अब काफी सुधार हो रहा है। हरियाणा सरकार ने भी कुछ ड्राफ्ट तैयार किए थे लेकिन उस पर कोई काम नहीं हुआ तो आवश्यकता है कि व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन तमाम स्कीमों को तुरंत लागू किया जाए।

  • संदीप सेठी, पूर्व अध्यक्ष, जिला टैक्स बार एसोसिएशन

काफी समय के बाद में सुधार हुआ है, हम इसका समर्थन करते हैं। लेकिन अभी भी स्टेट ओर सेंट्रल टैक्स सिस्टम में और सुधार की आवश्यकता है। मेरा मानना है कि सीजीएसटी वालों को और ज्यादा सुधार करने की आवश्यकता है। हर बात पर एफआईआर करना या अरेस्टिंग करना, पुलिस को बुला लेना, मैं इसमें थोड़े और सुधार की गुंजाइश को देखता हूं।
शुरुआती जांच में पुलिस की दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए।

  • विजय शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता

जीएसटी एक अच्छा कानून है लेकिन मैं देखता हूं कि इसमें अभी सुधार की बहुत गुंजाइश है। ई-इनवाशिंग का जो प्रोजेक्ट है वह काफी लेट हो रहा है। इससे व्यापारी को एक ही बिल को कई बार अपलोड करना पड़ता है। कई रिटर्न भरनी पड़ती है। ई-इनवॉइस आने के बाद में एक ही रिटर्न से सब कुछ हो जाएगा और टैक्स क्रेडिट लेने में भी दिक्कत कम होगी, परेशानियों का कम सामना करना पड़ेगा। समय पर अपनी रिटर्न भरे और सरकार की गाइडलाइंस का पालन करें।

  • सचिन कथूरिया, पूर्व चेयरमैन, सीएमए चैप्टर

आने वाले समय में ई-कॉमर्स बिजऩेस का समय रहेगा इसलिए मैं सरकार से और व्यापारियों से भी यह कहना चाहूंगा कि ई-कॉमर्स बिजनेस पर ध्यान दें और सरकार ई-कॉमर्स से जुड़े नियमों को आसान बनाएं और इंफोर्समेंट का कम से कम इस्तेमाल करें जिससे सामान्य व्यापारी भी ई-कॉमर्स बिजऩेस में अपनी भागीदारी को सुनिश्चित कर सकें। समय-समय पर सेमिनार आदि लगाकर के पारंपरिक व्यापार करने की व्यवस्थाओं में थोड़ा परिवर्तन किया जा सके। जागरूकता पर काम करने की अभी आवश्यकता है।

  • रामअक्षय, सीए, राइटर, टैक्स कंसलटेंट

जीएसटी कानून ठीक है लेकिन इसके अंदर नए रजिस्ट्रेशन में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें दो अथॉरिटी काम करने लग जाती है स्टेट की भी और सेंट्रल की। इसको ध्यान दे करके इस समस्या पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इंस्पेक्टर राज में कोई विशेष कमी नहीं देखी गई है।

  • सतेन्द्र यादव, कोषाध्यक्ष, जिला टैक्स बार एसोसिएशन

कर अपवंचन के मामले बहुत ज्यादा है और यह किसी व्यापारी ने चोरी नहीं की है बल्कि पीछे हुए तमाम तरह के नियमों में परिवर्तन के कारण यह सब समस्याएं आ रही है। मैं मांग करना चाहता हूं कि पीछे के मामलों में कुछ रियायत देते हुए उन मामलों को जल्द से जल्द निपटारा करना चाहिए। मैं व्यापारियों से भी कहना चाहूंगा कि वह रजिस्टर्ड व्यापारी से सामान खरीदें विशेष तौर पर b2b वालों को तो ध्यान रखना ही चाहिए।

  • सौरभ राघव, सीएमए

सरकार ने बहुत बड़े-बड़े सपने दिखाए थे और हमने उसको स्वीकार भी किया। हमें लगा कि बहुत जल्दी टैक्स सिस्टम में सुधार हो जाएगा लेकिन अभी छोटे व्यापारियों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मेरा यह मानना है कि सरकार ने बड़े व्यापारियों के प्रति तो अपना जिम्मेदारियों का निर्वहन किया लेकिन छोटे व्यापारियों पर ध्यान नहीं दिया। हम सरकार से यह मांग करेंगे कि छोटे व्यापारियों पर ध्यान दें, टैक्स के सिस्टम में और सरलीकरण करें।

  • परविंदर राजपाल, व्यापारी
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