दंगे की आग में झुलसाया जा रहा शिक्षा के मंदिर को

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 8 जनवरी ! देश के इतिहास में पहले ऐसा कभी नहीं देखा गया कि जो विश्वविधालय हर क्षेत्र में शोध करने का केंद्र हो उस को एक गहरी साजिश के तहत दंगे की आग में झोंक दिया गया हो परंतु आज इस देश यह सब जेएनयू के साथ किया जा रहा है! पिछले काफी समय से एक सुनियोजित तरीके से जेएनयू व उस के छात्रों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है! अब पूरे देश के सामने यह खुलासा होते जा रहा है कि देश की सत्ता पर इस वक्त बैठे जो लोग अपने आप को देश भक्त कहते हैं वास्तव में वे देश के बहुत बड़े दुश्मन हैं क्यों कि देश के जिन विश्वविधालयों ने शिक्षा जगत में शोध कार्यों के लिए देश का नाम रोशन किया उन्हीं विश्वविधालयों को देश की सत्ता पर काबिज लोग दंगे की आग में झोंक कर बंद करवाना चाहते हैं! जेएनयू के परिसर में घुस कर लगभग 50 के करीब नकाबपोश गुंडे हमलावरों ने छात्रों पर जबरदस्त हमला किया और इस हमले में 37 छात्र घायल हुए व आठ छात्रों के हाथ पैर में फ्रैक्चर हुआ तथा जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष के सिर में चोट लगी! कई घंटों तक हमलावरों ने गुंडागर्दी का नंगा नाच किया और छात्राओं व अध्यापकों को भी बुरी तरह मारा गया! इस से पहले जेएनयू के छात्रों की कई दिन तक फीस बढ़ोतरी के विरोध में हड़ताल चली व बढ़ाई गई फीस की वापसी की मांग को ले कर जब शांतिपूर्ण ढंग से धरने व प्रदर्शन किये गये तो वहां भी पुलिस के छात्रों पर जबरदस्त लाठीचार्ज कर के बुरी तरह पीटा गया यहां तक कि जेएनयू में पढ़ने वाले विकलांग छात्रों को भी बुरी तरह पीटा गया!

जरा अब सोचिये कि देश के हर प्रांत से पढ़ने के लिए आये हुए छात्रों के साथ यह दमनकारी रवैया क्यों अपनाया जा रहा है? देश की सत्ता पर बैठे कथित कटटरवादी पार्टी के लोग रिसर्च करने वाले छात्रों को इस लिए पसंद नहीं करते कि जो छात्र किसी भी विषय में जब रिसर्च कर के पीएचडी कर लेगा तो उस में तर्क करने की क्षमता पूर्ण रूप से आ जाएगी और वह छात्र इन कटटरपंथी नेताओं की थोपी हुई बात को मानेगा नहीं तो इन कटटरपंथी नेताओं की दुकानदारी चल नहीं पाएगी! इन सभी कारणों की वजह से जेएनयू के छात्रों पर जो हमला किया गया वो एक प्रकार से भारत की शिक्षा व संस्कृति पर जबरदस्त हमला है और इस हमले का पुरजोर जवाब दिया जाना चाहिए!

भारतीय शिक्षा और संस्कृति यह नहीं कहती कि इस देश में हमेशा तथाकथित हिन्दुवाद के नाम पर हिंसा की जाये! इन दिनों सोशल मीडिया व वट्सएप पर एक सुनियोजित तरीके से कटटरवाद की भाषा लिखते हुए हिंदू मुस्लिम के बीच जो नफ़रत की आग फैलाई जा रही है वह आग एक दिन नफ़रत फैलाने वालों को भी निगल जायेगी!

जेएनयू के छात्रों पर किये गए हमले के मामले पर जब आम आदमी पार्टी के हरियाणा के क़ानूनी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक वर्मा से बात की गई तो उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि देश की सत्ता पर बैठे कटटरपंथी नेताओं को शोध के क्षेत्र में पढ़ने वाले छात्रों व पढ़ाने वाले विश्वविधालयों से इस लिए तकलीफ है कि रिसर्च में पारंगत हो कर ये पड़े लिखे छात्र इन महामूर्ख कटटरपंथी नेताओं की बात नहीं मानेंगे और शोध कार्यों में प्रगति कर रहे विश्वविधालय कटटरपंथ को कभी बढ़ावा देते नहीं! अशोक वर्मा ने आगे बताया कि इस देश में नालंदा व तक्षशिला जैसे ज्ञान विज्ञान से भरपूर विश्वविधालय हुए हैं और इन में उस वक्त विश्व के दूसरे मुल्कों से छात्र पढ़ने के लिए आते थे परंतु इन विश्वविधालयों में कभी भी कटटरपंथी पढ़ाई नहीं हुई! एडवोकेट वर्मा ने जेएनयू के छात्रों पर हुए हमले की घोर निंदा करते हुए कहा कि इस वक्त आरएसएस व भाजपा के कटटरपंथी नेता जेएनयू में तथाकथित कटटरपंथ व हिन्दुवाद की पढ़ाई को थोपना चाहते हैं! इन्हीं कारणों के चलते जेएनयू के छात्रों पर ये हमले करवाये जा रहे हैं!

किसान नेता चंद्रभान काजला से जब बात की गई तो उन्होंने सीधा सीधा आरोप आरएसएस और भाजपा पर लगाते हुए कहा कि गृहमंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे से एक गहरे सुनियोजित षड्यंत्र के तहत जेएनयू के छात्रों पर हमला करवाया है! आरएसएस का एक संगठन छात्रों का एबीवीपी है और आरएसएस ने अपने इस संगठन के माध्यम से जेएनयू में हमेशा दंगे भड़काने का काम किया है! चंद्रभान काजला ने खुलेआम आरोप लगाते हुए कहा कि आरएसएस व भाजपा के कटटरपंथी संगठन जेएनयू के छात्रों की रिसर्च और प्रतिभा को हजम नहीं कर पा रहे क्यों कि आरएसएस व भाजपा के नेताओं को तो उन की अंधभक्ति करने वाले छात्र चाहियें जो कि जेएनयू के छात्रों के द्वारा संभव नहीं! इन्हीं कारणों से जेएनयू के छात्रों को हर प्रकार से प्रताड़ित करते हुए आरएसएस व भाजपा के नेता अपनी बात मनवाने के लिए ही जेएनयू के पीछे पड़े हुए हैं!

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