जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में व्हाइटबोर्ड की जगह ले रहे है डिजिटल इंटरएक्टिव बोर्ड

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फरीदाबाद, 15 जनवरी ! डिजिटलाइजेशन के युग में डिजिटल क्लासरूम की अवधारणा आधुनिक शिक्षा प्रणाली को तेजी से बदल रही है। इसी कड़ी में जे.सी. बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद ने शिक्षण प्रक्रिया को और अधिक संवादात्मक बनाने के लिए डिजिटल इंटरएक्टिव बोर्ड के माध्यम से डिजिटल क्लासरूम विकसित करने की पहल की है। विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न विभागों में डिजिटल इंटरएक्टिव बोर्ड युक्त 13 डिजिटल क्लासरूम स्थापित किए हैं जो शिक्षण के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पारंपरिक व्हाइटबोर्ड की जगह लेंगे। इस प्रकार, विश्वविद्यालय डिजिटलीकरण को बढ़ावा देते हुए कक्षाओं में डिजिटल इंटरैक्टिव बोर्ड की पहल करने वाले राज्य में पहला विश्वविद्यालय बन गया है।

कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने एलईडी आईआर टप डिजिटल इंटरएक्टिव बोर्ड युक्त डिजिटल कक्षाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कुलसचिव डाॅ. एस.के. गर्ग के अलावा सभी डीन, विभागाध्यक्ष और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। डिजिटल इंटरैक्टिव बोर्ड के सही उपयोग को लेकर एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन भी किया गया।  ये डिजिटल इंटरएक्टिव बोर्ड मानव संसाधन विकास मंत्रालय की राष्ट्रीय परियोजना कार्यान्वयन इकाई (एनपीआईयू) द्वारा टीईक्यूआईपी प्रतिभागी संस्थानों को प्रदान किये गये है। तकनीकी शिक्षा में डिजिटलीकरण के माध्यम से से मिश्रित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एनपीआईयू देश के टीईक्यूआईपी के दूसरे व तीसरे चरण के प्रतिभागी संस्थानों को सुविधाएँ प्रदान कर रहा है। विश्वविद्यालय के डिजिटल इंडिया प्रकोष्ठ द्वारा एनपीआईयू के माध्यम से डिजिटल क्लासरूम विकसित करने की पहल की गई है। जे.सी. बोस विश्वविद्यालयएकमात्र राज्य विश्वविद्यालय है जिसने एनबीए मान्यता तथा डिजिटल पहल के आधार पर एनपीआईयू के पूर्वनिर्धारित मानदंडों को पूरा करते हुए सुविधा का लाभ उठाया।

कुलपति प्रो दिनेश कुमार ने विश्वविद्यालय द्वारा की गई पहल पर प्रसन्नता व्यक्त की और शैक्षणिक सदस्यों से सुविधा का श्रेष्ठतम उपयोग करने का आग्रह किया। इस अवसर पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि डिजिटल क्लासरूम शैक्षिक क्षेत्र में एक क्रांति बदलाव हैं। आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग से विकसित इंटरैक्टिव क्लासरूम विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए ऐसा अनुकूलित वातावरण प्रदान कर रहे है जहां वे अध्ययन के विषय को लेकर अपनी सभी प्रकार की शंकाओं का निवारण कर सकते है। टीईक्यूआईपी निदेशक, प्रो. विक्रम सिंह ने बताया कि डिजिटल क्लासरूम के लिए एनपीआईयू द्वारा विश्वविद्यालय को मौजूदा आवंटन से अधिक फंड उपलब्ध करवाया गया है और विश्वविद्यालय हरियाणा राज्य में एकमात्र टीईक्यूआईपी प्रतिभागी संस्थान है, जिसे यह सुविधा प्रदान की गई है इसके अलावा, राज्य में संचालित केंद्रीय पोषित तकनीकी संस्थाओं जैसे एनआईटी कुरूक्षेत्र को प्रदर्शन आधारित मापदंडों पर सुविधा का लाभ मिला है।  डिजिटल इंडिया की नोडल अधिकारी डॉ. नीलम दूहन ने कहा कि इस पहल से न केवल विद्यार्थियों का अध्ययन के प्रति नजरिया बदलेगा बल्कि शिक्षकों को मल्टीमीडिया आधारित पाठन सामग्री तैयार करने में भी मदद मिलेगी, जो विद्यार्थियों के लिए अधिक रुचिकर होगी। उसने बताया कि इस दिशा में विश्वविद्यालय ने पहले भी कई डिजिटल पहल की है, जिसमें आनलाइन ओपन लर्निंग के मुक्स पाठ्यक्रम, डिजी-लॉकर्स, राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी (एनएडी) और डिजिटल नोटिस बोर्ड आदि शामिल हैं।

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