जीएसटी घोटाले में सरकार व व्यापारी दोनों ही दोषी !

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 25 नवंबर। हरियाणा प्रदेश में इस वक्त कई दिनों से जीएसटी के जो घोटाले खुल रहे हैं उनमें प्रथम दृष्टया तौर पर सरकार व व्यापारी दोनों ही दोषी नजर आ रहे हैं! जनता से जब इस बारे में विचार जाने गए तो कुछ लोगों के विचार ये थे कि सरकार ने जल्दबाजी में कई कानूनों को मर्ज कर के जीएसटी कानून बनाया और देश की गरीब व वंचित वर्ग की जनता का ख्याल रखे बिना जीएसटी को लागू कर दिया! यदि जमीनी स्तर पर देखा जाये तो जीएसटी की जटिलताओं में व्यापारी तो उलझा ही उलझा परंतु इन जटिलताओं में टैक्स विभाग के अधिकारी व सीए भी उलझ कर रह गए! इस उलझन उलझन में रिटेल व्यापार में बहुत फर्क पड़ा! हर क्षेत्र के रिटेल व्यवसाय में जब उत्पाद की कीमतें जीएसटी की वजह से बढ़ी तो उसका सीधा-सीधा असर आम आदमी पर पड़ा! बहुत से ऐसे उत्पाद भी थे जिन पर सेल टैक्स नहीं लगता था परंतु जीएसटी लगने लगा तो वहां पर दुकानदार और ग्राहक के बीच की लड़ाई आ गई! इस लड़ाई के मद्देनजर ही अपना व्यवसाय बचाने के लिए व्यापारी को जीएसटी में भी टैक्स चोरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा!

सरकार को जीएसटी की सलाह देने वाले नीतिकार जमीनी स्तर के अनुभवी ना होने की वजह से ही सरकार ने बार-बार जीएसटी की दरों में उतार चढ़ाव के बदलाव किये! उस कारण भी व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ! वास्तव में तो हमारे सिस्टम के साथ साथ जब तक राजनेताओं में भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा तब तक ये घोटाले होते रहेंगे! जीएसटी लागू हो जाने के बाद देश की कई बड़ी राजनैतिक पार्टियों से संबंधित व्यापारियों ने ही जीएसटी के घोटाले किये! यह कटू सत्य है! देश के प्रधानमंत्री ने तो अपने आप को ईमानदार घोषित करते हुए जीएसटी लागू कर दिया परंतु भाजपा समर्थित व्यापारी ही अंदरखाते जीएसटी का घोटाला करने में लग गए! जीएसटी के इस सारे खेल में सरकारी अधिकारी सरकार के नेताओं व सरकार समर्थित व्यापारियों के चक्रव्यूह में फंस गए!

इस विषय में जब फरीदाबाद टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप सेठी से बात की गई तो उन्होंने जीएसटी में सरकार की खामियों के बारे में बताते हुए कहा कि जीएसटी नंबर देने के वक्त जो वेरिफिकेशन की जाती है उस में काफी कमियां है! जीएसटी नंबर ऑनलाइन केवल आधारकार्ड व पैनकार्ड की कॉपी देने मात्र से ही मिल जाता है! साथ में एक रद्द किया हुआ खाली चैक भी लिया जाता है परंतु कोई भी दूसरे व्यक्ति की गारंटी नहीं ली जाती जबकी इस से पहले सेल टैक्स नंबर लेते वक्त किसी दूसरे आदमी की गारंटी ली जाती थी ताकि कोई भी टैक्स करने पर गारंटर को पकड़ा जा सके! संदीप सेठी का कहना है कि सरकार ने जीएसटी कानून बनाते वक्त जानबूझ कर कर चोर व्यापारियों के लिए टैक्स चोरी का रास्ता भी खुला छोड़ दिया! उनका कहना है कि सरकारी अफसरों की बजाय टैक्स चोर व्यापारियों पर सख्ती बरती जाये और सरकार के उन नेताओं की भी सख्ती से जाँच की जाये जो नेता व्यापारियों के साथ मिलकर टैक्स चोरी करवा रहे हैं!

गुरुग्राम टैक्स बार एसोसिएशन के सरंक्षक नवीन गुप्ता एडवोकेट से जब इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पूरे हरियाणा भर में टैक्स चोर व्यापारियों ने जीएसटी का बड़ा भारी घोटाला कर रखा है! हरियाणा के पानीपत, अंबाला व गुरुग्राम की काफी व्यापारिक फर्मों ने सैंकड़ों करोड़ रूपये का जीएसटी घोटाला कर रखा है! इन सबकी गहराई से जाँच होने के बाद सही मायने में मालूम हो जायेगा कि व्यापारी व सरकार दोषी है या सरकारी अफसर! कुछ उच्च स्तर के अधिकारीयों ने सरकार के नेताओं से मिलीभगत कर के नीचे स्तर के अधिकारीयों को फंसाने की साजिश भी रच रखी है! फरीदाबाद के ही फाइनेंस व ऑडिट में अनुभवी प्रवीण बंसल से जब बात की गई तो उन्होंने सीधे-सीधे जीएसटी के घोटाले के लिए टैक्स चोर व्यापारियों को ही दोषी माना और कहा कि जिन व्यापारियों की नियत ही खराब हो तो वे हमेशा टैक्स चोरी ही करते हैं! प्रवीण बंसल ने सरकारी अधिकारीयों को इस मामले में निर्दोष बताया! इस सारी बातचीत से हमारे पास निष्कर्ष यह निकला है कि सरकारी अधिकारियों का दोष कम है और सरकार व व्यापारी जीएसटी घोटाले के लिए दोनों ही बराबर के दोषी हैं!

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