जीएसटी के असली चोर हैं भगवाधारी !

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 9 जनवरी। जीएसटी के घोटाले लगातार सवालों के घेरे में बने हुए हैं! कभी बिल की धांधली तो कभी सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के मामले उजागर हो रहे हैं! भगवाधारी सरकार जीएसटी को सही ढंग से लागू करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है! अब तक देश में हजारों की संख्या में जिन कंपनियों के जीएसटी घोटालों के मामले उजागर हुए हैं उनमें से अधिकांश भगवाधारी नेताओं के आशीर्वाद से चल रही कंपनियां हैं!

जीएसटी को लागू हुए लगभग दो साल से ऊपर बीत चुके हैं परंतु अभी तक जीएसटी में चोरी रुक नहीं पाई! सूत्रों के अनुसार पूरे देश में अभी तक कई हजार करोड़ रूपये की जीएसटी टैक्स की चोरी के घोटाले सामने आये हैं! देश पर सत्तासीन भगवाधारी सरकार के नेताओं व उन के समर्थक व्यापारियों ने सरकारी अधिकारीयों से खुलेआम मिलीभगत कर के नकली बिलों का इस्तेमाल किया! योजनाबद्व तरीके से माल के लिए फर्जी चालान तैयार किये गये जो बिन माल सप्लाई नहीं किये जा सकते! इन फर्जी चालानों के आधार पर भगवाधारी सरकार समर्थित व्यापारी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर रहे हैं! इस के अलावा बहुत से भगवाधारी नेताओं की फर्जी कंपनियां सामान को वास्तव में एक्सपोर्ट किये बिना फर्जी चालानों के आधार पर जीएसटी रिफंड का दावा कर रही हैं! जीएसटी के सिस्टम में भगवाधारी नेताओं ने अपने समर्थक व्यापारियों को लाभ पहुँचाने के लिए जानबूझ कर बहुत सी खामियां छोड़ रखी हैं!

खरीददारी करने वाले लोगों के लिए सेल्स टैक्स प्रावधान में बदलाव कर के जीएसटी लागू करना सरकार का एक बहुत ही गलत फैसला साबित हुआ है क्यों कि कई बार ग्राहकों को गलत या फर्जी बिल दे दिये जाते हैं! बहुत से कारोबारी और दुकानदार पुराने सिस्टम से ही जीएसटी वसूल रहे हैं और इन में वैट व टिन नंबर लिखा होता है जो कि गलत तरीका है! बिल में जीएसटीआईएन का ब्यौरा करना चाहिए और इस में सेंट्रल जीएसटी और स्टेट जीएसटी का अलग उल्लेख होना चाहिए! बहुत से दुकानदार प्रोविजनल जीएसटी नंबर के साथ बिल देते हैं और ग्राहक को कहा जाता है कि जब उन को जीएसटीआईएन नंबर मिल जायेगा तो उस तरह का बिल देंगे!यह गलत तरीका है! बिल में जीएसटीआईएन मेंशन किये बिना ग्राहक से टैक्स वसूलना गलत है!

इस विषय में कई ग्राहकों से जब बात की गई तो उन कहना है कि जीएसटी को सरल किया जाये ताकि खरीददारी करने वालों को दिक़्क़त ना हो और व्यापारियों की परेशानी के बारे में कई ग्राहकों ने कहा कि जीएसटी रिफंड के क्लेम में धोखाधड़ी पर अंकुश लगाया जाये! ऐसे मामलों की गहराई से जांच की जाये और इन की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाये जायें! इनपुट टैक्स क्रेडिट के झूठे दावों के देश भर से उजागर हुए सभी मामलों व निर्यात और आयात में होने वाले फ्रॉड और फर्जी दावों की अनिवार्य तौर पर आयकर विभाग से जाँच कराई जाये! जमीनी स्तर पर जीएसटी को कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए सरल किया जाये व इसे ठीक से लागू किया जाये ताकि ईमानदार करदाता का उत्पीडऩ ना हो सके व साथ ही साथ कर चोरी कम हो सके!

लोगों की राय के अनुसार यह बात निकल कर आई कि व्यापारी देश की रीढ़ की हड्डी है और उन्हें जीएसटी के चक्रव्यूह में फंसा कर चोर ना बनाया जाये! जनता का कहना है कि देश की सरकार ने रातोंरात जीएसटी का कानून इतना जटिलता भरा बना दिया कि व्यापारी ना चाहते हुए भी चोरी के रास्ते पर चल पड़े! यदि जीएसटी को सरल कर दिया जाता तो पूरे देश भर में जीएसटी के इतने घोटाले कभी ना होते क्यों कि व्यापारी तो कभी भी जानबूझ कर टैक्स चोरी करना नहीं चाहता! सरकार की गलत नीतियों के कारण मजबूरीवश व्यापारी को टैक्स चोरी के रास्ते पर जाना पड़ता है! जीएसटी के असली चोर तो सभी भगवाधारी नेता हैं जिन्होंने अपनी कंपनियों में तो जबरदस्त जीएसटी की चोरी की और देश और राष्ट्र से चोरी यह की कि गलत नीति बनवा कर सभी को चोरी करने की तरफ धकेल दिया! देश के प्रधानमंत्री तो केवल अपने स्वयं को ही संसार का सब से सच्चा व ईमानदार घोषित करने से थकते नहीं जब कि देश की जनता के साथ अब तक के इतिहास में सब से ज्यादा धोखा और फरेब किया है! प्रधानमंत्री अपने आप को गरीब व चाय बेचने वाला कहते हैं! शर्म आनी चाहिए ऐसे प्रधानमंत्री को झूठ बोलते वक्त कि उन्होंने नोटबंदी व जीएसटी लागू करते वक्त गरीबों का ख्याल तक नहीं किया! असल में तो सब से बड़े चोर सभी भगवाधारी नेता हैं जो सरासर झूठ बोल कर लोगों के मेहनत से कमाए हुए धन की चोरी कर गये!

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