जीएसटी की दरों में बार-बार बदलाव से जनता हुई परेशान

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 27 दिसंबर। देश में जब से जीएसटी लागू किया गया तब से ही आम जनता बहुत परेशान है! इस खबर को पढक़र आप अवश्य चौकेंगे कि आम जनता क्यों परेशान है? परेशान तो व्यापारी होना चाहिये परंतु कटु सच्चाई तो यह कि व्यापारी और अफसर तो जीएसटी लागू होने के बाद फिर भी ज्यादा मजे में हैं क्यों कि व्यापारियों ने अफसरों व सेल्स टैक्स वकीलों से सांठगांठ कर के जीएसटी में भी टैक्स चोरी का रास्ता निकाल लिया है! जीएसटी की सबसे ज्यादा मार उपभोक्ता को सीधे तौर पर झेलनी पड़ रही है क्यों कि रिटेल के व्यवसाय में जिस सामान पर पहले टैक्स नहीं था उस पर तो जीएसटी का टैक्स लग गया और जिस सामान पर पहले टैक्स कम था उस पर अब जीएसटी टैक्स ज्यादा लगा दिया गया! रिटेल बाजार में जब एक बार सामान में व्यापारी ने बढ़ा हुआ टैक्स जोड़ कर कीमत बढ़ा कर लगा दी तो वह कीमत सामान की कम नहीं होगी और बाजार में जीएसटी के बाद हर सामान की महंगाई बढ़ चुकी है! व्यापारी को तो जीएसटी का इनपुट क्रेडिट के माध्यम से राहत मिल जायेगी परंतु उपभोक्ता को तो सामान महंगा ही मिलेगा! जीएसटी के मामले में रोजाना बड़े बड़े घोटाले खुल रहे हैं! सरकार की गलत नीतियों का फायदा सरकारी अफसर, नेता, व्यापारी व सेल्स टैक्स वकील सब से ज्यादा उठा रहे हैं! आम जनता को तो जीएसटी से नुकसान ही नुकसान है! अब जरा सोचिये कि इस सारे मामले में फायदा किस का हुआ तो मालूम पड़ता है कि व्यापारी व अफसर पहले से ज्यादा भ्रष्टाचार व टैक्स चोरी करने लगे और टैक्स सलाहकारों व टैक्स वकीलों की दुकानदारी ज्यादा चल पड़ी व आम जनता को टैक्स की मार से सामान ज्यादा महंगा मिलने लगा! सेल्स टैक्स को बदल कर जीएसटी लागू करने में सरकार को कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि रिश्वत की दुकानदारी ज्यादा बढ़ गई!

आइये! जरा अब बात करते हैं जीएसटी की दरों में बदलाव की तो नजर आता है कि पहले भी बहुत बार बदलाव हो चुके हैं और उन बदलावों की वजह से उपभोक्ता,व्यापारी व अफसर तीनों ही भारी परेशान है! इस बारे में अभी हाल ही में नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद्र ने कहा है कि जीएसटी में बार बार बदलाव की बजाय सालाना आधार पर ही संशोधन किया जाये और यह भी कहा है कि जीएसटी में केवल दो ही स्लैब होने चाहिये! अभी जीएसटी में चार स्लैब 5, 12, 18 व 28 प्रतिशत की दर के हैं जिन की वजह से आम जनता व व्यापारी काफी परेशान है!

जीएसटी की टैक्स रिकवरी में भी चिंताजनक स्थिति पैदा हो सकती है! केंद्र सरकार ने राज्यों को जो इनपुट क्रेडिट के मामले में कंपनसेशन के तहत 35,298 करोड़ रूपये दिए हैं वो विलंब से व बढ़ी मुश्किल से भुगतान किया है क्यों कि जीएसटी की रिकवरी की गति बहुत सुस्त है! इस भुगतान के बाद केंद्र सरकार के द्वारा जीएसटी रेवेन्यू बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है और इस योजना के तहत जीएसटी की दरें बढ़ाई जा सकती हैं! केंद्र सरकार की जीएसटी की योजना पूर्णतया फेल साबित हो रही है! अपनी की हुई गलतियों को ढकने के लिए अब सरकार जीएसटी के मामले में जब फर्जी फर्मों को तलाशने निकली तो पाया गया कि देश में लगभग 67 लाख फर्जी फर्मों का जीएसटी के तहत इनपुट क्रेडिट का फायदा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन हुआ है! इस गंभीर मामले में अब जरा सोचिये कि देश के प्रधानमंत्री ने केवल अपनी जिद्व में सेल्स टैक्स की योजना बदल कर जीएसटी करने में तो बड़ा भारी चोरी का रास्ता खोल दिया! प्रधानमंत्री को करना तो यह चाहिए था कि वैट और सेल्स टैक्स चोरी को कम करने के लिए सरकारी अफसरों,राजनैतिक नेताओं व व्यापारियों तथा सेल्स टैक्स वकीलों का टैक्स चोरी करवाने के लिए जो सिंडिकेट ग्रुप बने हुए हैं उन सभी को जेल की सलाखों के पीछे डालते तो टैक्स चोरी अपने आप खत्म हो जाती! जीएसटी की वर्तमान योजना से तो टैक्स चोरी व भ्रष्टाचार बढ़ा है और आम जनता जीएसटी के बार-बार बदलाव से भारी परेशान है!

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