गौरक्षण में भक्षण

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 16 जनवरी। धन्य हैं वे लोग जो गाय को माता का रूप दे कर इस देश में बड़े बड़े आंदोलन गाय माता के नाम पर कर के अपनी राजनैतिक रोटियां सेंक रहे हैं! इन तथाकथित हिंदूवादी दंगाइयों की वजह से ही गाय की रक्षा के नाम पर गौ रक्षक दल बनाकर गुंडागर्दी करते हुए बेकसूर लोगों पर गौ माँस के झूठे व फर्जी केस बनवा दिए जाते हैं! देश की सुप्रीमकोर्ट भी अब ऐसे दंगाइयों से परेशान हो चुकी है! ये तथाकथित गौ रक्षक गायों की दुर्दशा पर ध्यान देते नहीं बल्कि सारा साल गाय के नाम पर दंगे ही दंगे करते रहते हैं! इन दंगाई गौ रक्षकों की गौ तस्करों से बड़े स्तर पर सांठगांठ हैं और गाय के चमड़े का व्यापार करने वाले लोगों से मिलीभगत कर के ये गौ रक्षक गौशालाओं में बूढ़ी हो चुकी गायों को गौशालाओं के अधिकारियों से भी मिलीभगत कर के गौ तस्करों को काटने के लिए बेच देते हैं! पर्दे के पीछे का यही कड़वा सच है! हो सकता है कि मोदी व खट्टर के अंधभक्तों को यह सच्चाई अच्छी ना लगे! परंतु ये नकली गौ भक्त व नकली गौ रक्षक बेसहारा गायों की सही ढंग से देखभाल करने में पूर्णतया फेल हैं! इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण हरियाणा के हिसार नगर के पास ढंढूर गावं में गौ अभ्यारण में 529 गायों की हुई दर्दनाक मौत से मिलता है! सूत्रों के अनुसार इस गौ अभ्यारण में बिना शेड के ठंड में भूखी प्यासी तड़प तड़प कर मरने वाली गायों की संख्या लगभग 700 के करीब है! इनकी देखभाल को ना तो कर्मचारी थे और ना ही ईलाज के लिए डॉक्टर! कहाँ चले गये वो सभी मोदी के अंधभक्त नकली गौ भक्त व नकली गौ रक्षक? ये सभी लोग केवल गायों के नाम पर दान लेकर हजम करने वाले लोग हैं! कहाँ गायब हो गये अब विश्वहिंदू परिषद के ठेकेदार अधिकारी? आरएसएस के अधिकारी तो आजकल राजसत्ता का सुख भोगने की कसरत में व्यस्त रहते हैं! भूखी प्यासी ठंड से जबरदस्त पीडि़त तड़प तड़प कर मरने वाली इन 529 गायों की दर्दनाक मौत पर क्या भारत के संतों का दिल भीनहीं पसीजा! हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर को तो अपनी कुर्सी बचाने के खेल से ही फुरसत नहीं है! ये सभी आरएसएस के प्रचारक केवल गाय के नाम पर राजसत्ता का सुख भोगते हैं! तडफ़ती हुई गायों की इन लोगों को कतई परवाह नहीं है! जनता का कहना है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर प्रदेश की व्यवस्था संभालने में पूर्णतया फेल हो चुके हैं! इन तड़प तड़प कर मरने वाली गायों की बद दुआ से राजसत्ता का सुख भी जाता रहेगा! जरा अब चलते हैं इस घटना की खबर की ओर!

हिसार के पास ढंढूर गावं में बेसहारा पशुओं के लिए जो गौ अभ्यारण बनाया गया था उस में किसी भी प्रकार की बुनियादी सुविधायें गायों को नहीं दी गई! बुनियादी सुविधाओं की कमी की वजह से एक महीने के दौरान लगभग 700 से ज्यादा गायों की मृत्यु होना एक घोर चिंता का विषय है! यह केवल एक साधारण मामला ना हो कर सरासर गौ हत्या का मामला बनता है! पिछले कुछ दिनों से प्रतिदिन 30 से 40 गायों की मृत्यु हो रही थी! यदि प्रशासन शुरू में ही ध्यान देता तो इतनी गायों की मृत्यु नहीं होती! भूख प्यास व शैलटर की कमी से मरने वाली इन गायों के शैड के चारों तरफ सर्दी से बचाव के लिए कवरिंग चदरें नहीं लगाई गई और ना ही सर्दी से बचाव के लिए शैड में कोई बड़े हीटर का इंतजाम किया गया! प्रशासन द्वारा जानबूझ कर इस मामले को दबाया जा रहा है! यदि यह मामला उजागर नहीं होता तो और अधिक गौ हत्याएं हो सकती थी! प्रशासन द्वारा केवल एक गाय के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट दिखा कर यह साबित करना चाहा कि गाय के पेट से 20 किलो प्लास्टिक का कचरा निकला है! यह सरासर झूठ है! अब नगर निगम हिसार के मेयर गौतम सरदाना कुछ निगम पार्षदों की मिलीभगत से वेटरनेरी डॉक्टर पर आरोप लगा रहे हैं! इस गौ अभ्यारण में मौजूद एक वेटरनेरी डॉक्टर अमित शर्मा के अनुसार सर्दी से गायों का सही तरीके से बचाव नहीं हो पा रहा था! इसी कारण इन गायों की मृत्यु हुई!

हिसार नगर निगम के मेयर गौतम सरदाना व 11 पार्षद तथा तीन पार्षदों के प्रतिनिधी खुद इन गायों की मौत पर गंदी राजनीति करते हुए एक वेटरनेरी डॉक्टर को गायों की मौत के लिए जिम्मेवार ठहरा रहे हैं और एक बैठक कर के इन गायों की दर्दनाक मौत पर आवाज उठाने वाले लोगों की जुबान को बंद करने के लिए शहर वासियों से अपील कर रहे हैं कि गायों की मौत पर गंदी राजनीति ना की जाये! इस बारे में इस लेखनी के माध्यम से बता देना चाहते हैं कि हिसार के निगम अधिकारी व कर्मचारी,मेयर व विधायक और सभी पार्षद तथा आरएसएस व भाजपा के द्वारा बनाये गये सभी गौ रक्षक इन 529 गायों की दर्दनाक मौत के लिए सविंधान में दिये गये सभी प्रावधानों के तहत पूर्णतया दोषी हैं और ये सभी लोग इस मामले को दबाने की कितनी भी कोशिश चाहे कर लें परंतु यह मामला दबेगा नहीं! इन 529 गायों की मौत की आवाज पाताल से ले कर आकाश तक व धरती के हर कोने में हमेशा उठती रहेगी व एक महा आंदोलन का रूप ले लेगी!

दिनांक 8 अगस्त 2019 को इस गौ अभ्यारण में रिकॉर्ड के अनुसार लगभग 2440 की संख्या में गौ वंश को शिफ्ट किया गया! दिनांक 13 जनवरी 2020 को नगर निगम हिसार के उप आयुक्त के द्वारा उपनिदेशक पशुपालन एवं डेयरी व जिला गौ वंश विकास अधिकारी हिसार को भेजी गई एक रिपोर्ट के अनुसार दिनांक 11 दिसंबर 2019 से 11 जनवरी 2020 के बीच 529 गौ वंश की मौत हुई लिखी गई है! इस रिपोर्ट के अनुसार इन 2440 गौ वंश के अभ्यारण में कुल 12 कर्मचारी कार्यरत बताये गये हैं व पांच शैड छोटे बड़े बताये गये हैं! इस बारे में जब गौ अभ्यारण कमेटी के सदस्य व वार्ड 14 के पार्षद अमित ग्रोवर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अभ्यारण में मौजूद कर्मचारियों से उन्होंने जब मृत गायों का ब्यौरा माँगा तो कर्मचारियों ने नगर निगम कार्यालय से पता करने के लिए कहा! जब निगम कार्यालय में पूछा गया तो वहां के कर्मचारियों ने भी उन्हें ब्यौरा देने से इंकार कर दिया! अमित ग्रोवर ने कहा कि जब गौ अभ्यारण में लाई जाने वाली गायों का ब्यौरा रखा जाता है तो मृत गायों का भी ब्यौरा होना चाहिए! अमित ग्रोवर ने बताया कि अभ्यारण में पहुँच कर उन्होंने मृत गायों को ले जाते हुए वाहनों को देखा व 22 मृत गायों की वीडियो भी बनाई! उनका आरोप है कि इस गौ अभ्यारण को सरकार की तरफ से 10 करोड़ रूपये का बजट मिलने के बावजूद गायों के लिए पर्दे लगवाने को भी दानदाताओं की बाट देखनी पड़ती है! जब कि इस गौ अभ्यारण को एक पिकनिक स्पॉट बनाने के लिए झूले इत्यादि लगवाने में काफी खर्चा किया गया! अमित ग्रोवर ने यह भी बताया कि जब वे मृत गौ वंश को देखने ढंढूर गावं गये तो उन्होंने देखा कि गावं के थोड़ी दूर पर ही इन गायों का चमड़ा उतारा जा रहा था!

इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता रामनिवास राड़ा व आप पार्टी प्रवक्ता राजीव सरदाना ने कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मिल कर हिसार के उपायुक्त को एक ज्ञापन दिया! यह ज्ञापन गृहमंत्री,पशु कल्याण बोर्ड,भारत सरकार के सचिव व गौ सेवा आयोग के चेयरमैन तथा एसपी व उपायुक्त के नाम पर दिया गया! राजीव सरदाना ने बताया कि गौ अभ्यारण में गौ वंश की देखभाल में पूरी तरह से लापरवाही बरती गई है! पिछले एक माह में गायों के साथ क्रूरता की गई व गायों को पर्याप्त चारा व पीने की व्यवस्था नहीं दी गई तथा सर्दी से बचाव के कोई भी ठोस इंतजाम नहीं किये गये! राजीव सरदाना ने इन गायों की मृत्यु के लिए खुलेआम आरोप लगाया कि इन गायों की सही देखभाल व उपचार ना होने की वजह से ही करीब 529 गौ वंश की मौत हुई! उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में गायों की हुई मौत के लिए नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारी तथा गौ अभ्यारण के चेयरमैन गौतम सरदाना पूर्णतया दोषी हैं!

रमेश यादव एडवोकेट ने इस मामले में क़ानूनी रूप से बताया कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के सेक्शन 11 के भाग एक के उपभाग ज के अंतर्गत कानून है कि पर्याप्त खाना व जल या आश्रय ना देना पशु के प्रति क्रूरता का व्यवहार माना जायेगा यानि कि भूख प्यास व बाड़े यानि सेंटर की कमी की वजह से यदि पशु की मृत्यु होती है तो पशु जिस भी स्वामी की देखभाल के तहत होगा उस की मृत्यु की जिम्मेवारी उसी स्वामी की होगी! रमेश यादव ने बताया कि आईपीसी की धारा 428 व 429 के तहत भी अपराधिक मुकदमा बनता है! धारा 429 के अनुसार 50 रूपये की कीमत से ज्यादा पशु जिसमें गाय का भी जिक्र है की देखभाल सही ढंग से ना होने की वजह से मृत्यु होने पर पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है! इसके अलावा नगर निगम एक्ट 1994 के सेक्शन 410–411 के तहत भी अपराधिक मामला बनता है!

किसान नेता चंद्रभान काजला ने इस मामले पर सीधे सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि इन 529 गायों की मौत के लिए सभी हिंदूवादी दंगाई संगठन ही पूर्णतया जिम्मेवार है क्यों कि ये संगठन सारा साल गाय माता के नाम पर दुकानदारी करते हुए दान चंदे के रूप में आम जनता से करोड़ों रूपये ले कर डकार जाते हैं और गाय माता की देखभाल में एक पैसा भी नहीं लगाते! काजला ने आगे बताया कि मेयर गौतम सरदाना व पार्षद अब खाल बचाने के लिए एक वेटरनेरी डॉक्टर पर जो आरोप लगा रहे रहे हैं वो सरासर झूठे व गलत है क्यों कि 2440 गायों की देखभाल के लिए यहाँ पर कोई भी वेटरनेरी अस्पताल नहीं बनाया गया जब कि 2440 गायों की देखभाल के लिए 3 से 5 वेटरनेरी सर्जन डॉक्टर 50 के करीब दूसरा स्टॉफ जिसमें छोटे डॉक्टर,कम्पाउडर व हैल्पर का स्टॉफ होना जरूरी है! चंद्रभान काजला ने बताया कि इन 2440 गायों की साफ सफाई व इन के गोबर के प्रबंधन के लिए 100 के करीब अन्य कर्मचारियों की भी नियुक्ति होनी चाहिए थी! इन 2440 गायों की देखभाल के लिए बुनियादी ढांचा व मैनेजमेंट उपलब्ध ना कराये जाने की वजह से ही 529 गायों की मृत्यु हुई जिस के लिए सरकार पूर्णतया दोषी है!

जनवादी सफाई कर्मचारी कल्याण संघ के सलाहकार राजेंद्र सरोहा का कहना है कि अपने आप को गौ भक्त,गौ सेवक व गौ रक्षक कहने वाली भाजपा सरकार के राज में इन 529 गायों की दर्दनाक मौत के पीछे एक सुनियोजित साजिश का अंदेशा है! यह साजिश चमड़ा व्यापारियों की मिलीभगत से है! सीधे सीधे यह मामला गौ हत्या का बनता है! राजेंद्र सरोहा ने कहा कि इन मृत गायों की खाल व शरीर के अन्य अंगों के लिए चमड़ा व्यापारियों की मिलीभगत से यह घृणित खेल खेला गया है! उन्होंने कहा कि इस सारे मामले की गहरी जाँच कराई जाये और यह मामला सीबीआई को सौंपा जाये ताकि गायों की मौत का सही राज खुल सके और दोषी लोगों पर अपराधिक मामले दर्ज किये जायें!

गुरुग्राम में स्थित पक्षियों के अस्पताल के डॉक्टर राजकुमार ने कहा कि पशु पक्षी की भी इंसान की तरह ही देखभाल होनी चाहिए! इंसान तो बोल के भूख प्यास व ठंड लगने के बारे में बता कर बचाव कर सकता है परंतु बेजुबान जानवर तो भूख प्यास व ठंड लगने के बारे में बता नहीं सकता! इसलिए बेजुबान गायों की देखभाल में लापरवाही नहीं करनी चाहिए थी! डॉक्टर राजकुमार ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में गायों की मौत एक बहुत ही गंभीर मसला है और इस मसले में सभी दोषी लोगों के खिलाफ अपराधिक मुकदमे दर्ज कर के सख्त से सख्त सजा दी जाये!

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