गुरूग्राम के जीएसटी घोटाले की गहरी जांच की जाये

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 5 दिसंबर। गुरुग्राम के उधोग विहार के थाने में दिनांक 6 अगस्त 2016 को जीएसटी के एक घोटाले में मै. पार्थ इंडस्ट्रीज शैड न.137 उधोग विहार फेस 5 नामक फर्म के खिलाफ एक्साइज टेक्सेशन विभाग वार्ड 3 के आफिसर अरुण गौड़ ने एक एफआईआर नं. 0281 आईपीसी की धारा 420 व 465 के तहत दर्ज कराई थी! इस फर्म का टिन न.06421843549 है व इस फर्म ने जानबूझ कर टैक्स चोरी के इरादे से सी फार्म का डिक्लेरेशन झूठा भरा था! जब एक डीलर ने सी फार्म के लिए आवेदन किया तो वैरिफिकेशन फर्म की ना होने पर सी फार्म नहीं दिए गए! उस के बाद फर्म का सेल्स टैक्स रजिस्ट्रेशन 14 जून 2014 को रद्ध कर दिया गया और डीलर को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया! उसके बाद एक एक अनजान व्यक्ति ने सेल्स टैक्स आफिस आ कर उसी फर्म के सी फार्म जमा करवाये तो शक होने पर उस की रसीद विभाग के द्वारा कब्जे में ले ली गई! जांच करने पर पता लगा कि यही सी फार्म पहले दूसरे किसी डीलर को जारी किये गये थे ना की पार्थ इंडस्ट्री को! पार्थ इंडस्ट्री ने अपने द्वारा किये गये व्यापारिक लेन देन के एवज में इन सी फार्मों को इस्तेमाल किया!

इसके बाद दिल्ली के वैट विभाग को सूचित किया गया! मै. पार्थ इंडस्ट्रीज और दूसरी फर्म दोनों ही दिल्ली के ट्रेड व टैक्स विभाग में रजिस्टर्ड थी! सेंट्रल सेल्स टैक्स एक्ट 1956 के सैक्शन 10 ए के तहत झूठी डिक्लेरेशन भरने के जुर्म में एफ आई आर दर्ज की गई! इस मामले की शिकायत दिनांक 28 जुलाई 2016 को डायरी नं. 199-5 पी 2 डी टी के तहत दर्ज हुई! इस जीएसटी के घोटाले में लगभग 44 करोड़ रूपये का लेन देन इनपुट क्रेडिट टैक्स का फायदा लेने के लिए किया गया!

जीएसटी के इस घोटाले में एक्साइज व सेल्स टैक्स विभाग के कई कर्मचारी व अन्य लोग शामिल है! इस उपरोक्त व्यापारी फर्म के द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट का धोखाधड़ी से फायदा उठाने के लिए यह जीएसटी का घोटाला किया गया! इस घोटाले में एक्साईज व सेल्स टैक्स विभाग गुडग़ावं के कर्मचारी हनीश तलूजा के साथ साथ एक चार्टड एकाउटेंट, कम्प्यूटर आपरेटर व विभाग के उच्च स्तर के अधिकारी शामिल है! इस घोटाले के केस में राकेश अरोड़ा व हनीश तलूजा नामक दो अपराधियों को गिरफ़्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया! दिनांक 24 जनवरी 2019 को गुरुग्राम के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में इस केस में चालान नं. 340/2019 पेश किया गया!

दिनांक 25 जनवरी 2019 को सुनवाई के तहत इस केस का ट्रायल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट गुरुग्राम की अदालत में राकेश अरोड़ा व हनीश तलूजा के खिलाफ पंजाब एक्साईज एक्ट (संशोधन दिल्ली) के सैक्शन 68 के तहत शुरू हुआ! जिसमें आगामी तारीख 2 फरवरी 2019 रखी गई! 2 फरवरी 2019 को ही हनीश तलूजा की तरफ से गुरुग्राम की सेशन कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी लगी हुई थी जिस को सेशन जज आर.के. सोंधी ने खारिज कर दिया व सेशन कोर्ट ने इस घोटाले की जांच के लिए एक एसआईटी गठन करने का आदेश साथ में दिया! 2 फरवरी 2019 को सेशन कोर्ट के इस केस में सरकार की तरफ से सरकारी वकील अनुराग हुड्डा पेश हुए थे! 2 फरवरी 2019 को सीजेएम की अदालत में आगे 11 अप्रैल की तारीख मिल गई और उस के बाद राकेश अरोड़ा को जमानत मिल गई! 11 अप्रैल 2019 को सीजेएम की अदालत में राकेश अरोड़ा जमानत होने के बाद पेश हुआ! 9 अक्टूबर 2019 को सीजेएम की अदालत में अपराधी राकेश अरोड़ा के साथ हनीश तलूजा भी जमानत होने के बाद पेश हुए! एसीपी डीएलएफ वन को एसआईटी का मुखिया बनाये जाने का आदेश दिया व अगली तारीख पर एसीपी डीएलएफ वन को पेश होने का आदेश दिया गया! 20 नवंबर 2019 को तारीख पर अगली तारीख 16 जनवरी 2020 चार्ज पर सुनवाई व सप्लीमेंट्री चालान पेश करने के लिए दी गई!

इस केस में एक गंभीर मामला यह बनता है कि विभाग के सरकारी पोर्टल से छेड़छाड़ किसने की! सूत्रों के अनुसार विभाग का पोर्टल विभाग के प्रदेश कार्यालय में उच्च अधिकारीयों की देखरेख में होता है! जहां तक सवाल उठता है कि बोगस फर्मों को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट देने के लिए पोर्टल के पासवर्ड किसने लिक किये तो पूरा पूरा शक का दायरा विभाग के उच्च अधिकारीयों पर ही जाता है! पासवर्ड का दुरूपयोग केवल प्रदेश कार्यालय में बैठे उच्च अधिकारीयों ने ही किया है! इस कारण जीएसटी के इस घोटाले में एक्साईज एवं सेल्स टैक्स विभाग के उच्च अधिकारी व व्यापारिक फर्म के मालिक ही पूर्णतया दोषी है! यदि इस केस में लोकल गुरुग्राम कार्यालय स्तर के अधिकारीयों पर आरोप लगते हैं तो उन आरोपों की पूरी गहराई से जांच की जाये ताकि नीचे स्तर के कोई भी निर्दोष अधिकारी इस जीएसटी घोटाले में गलत तरीके से ना फसाएँ जाये! विशेष तौर पर आगे इस केस में व्यापारिक फर्म पार्थ इंडस्ट्रीज के खिलाफ कार्यवाही शुरू की जाये जो कि अभी तक हुई नहीं!

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