गर्व से कहो कि हम ही गौ हत्यारे हैं !

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 27 जनवरी। धन्य हैं गौ चमड़े के वे हिंदू सौदागर जो मृत गाय को दफनाने की बजाय गाय के शरीर की चीरफाड़ करके खाल, हड्डियां व अन्य अंगों का सौदा करते हैं! धन्य है मोदी और खट्टर की ऐसी सरकार जिसमें हिंदू ही गाय को मार रहे हो और हिंदू ही गाय का मांस, हड्डियां और अन्य अंगों को बेच रहे हों! ऐसी मोदी व खट्टर सरकार को चुल्लु भर पानी में डूब मरना चाहिये! धन्य है हिसार भाजपा के विधायक डा. कमल गुप्ता व मेयर गौतम सरदाना तथा गौ रक्षा दल के सभी सदस्य जिन की कृपा से हिंदू धर्म की सबसे पवित्र माने जाने वाली गाय माता की हिसार में हुई दुर्गति भारत के इतिहास में हमेशा हमेशा के लिए याद की जायेगी! यहां पर विशेष तौर पर बता दें कि हिसार के गौ अभ्यारण में हुई लगभग 700 गायों की मौत के बाद निगम के ठेकेदार ने इन गायों को दफनाने की बजाय बुरी तरह चीरफाड़ के इनकी खाल व हड्डियां तथा अन्य अंग इन सभी भाजपा नेताओं व गौ रक्षक दल के सदस्यों की मिलीभगत से बेचने के लिए निकाले हैं! यह एक घोर अपराध है!

इन 700 गायों की मौत के बाद इनके शरीर को चीरफाड़ करने की घटना से साबित हो गया है कि इन 700 गायों की मौत के लिए ये सभी भाजपा के लोग जिम्मेवार है और ये सभी हिंदू हैं! देखिये जरा गौर से कि हिंदू ही गायों की दुर्गति कर रहे हैं! ये सभी नकली हिंदू हमेशा ही हिंदुओं के ठेकेदार बनते हैं और मुस्लिमों पर गाय मांस के फर्जी केस बनवाते हैं! ये सभी भाजपा के लोग इन 700 गायों के लिए यमराज बनकर आये और इन 700 गायों की हत्या की! इन 700 गायों की हत्या के लिए इन सभी भाजपा नेताओं पर अपराधिक मामले बनते हैं! चाहे ये कितनी भी लीपापोती कर लें परंतु वक्त इन्हें जेल की सलाखों के भीतर एक दिन जरूर भिजवायेगा!

हिसार के विधायक कमल गुप्ता ने गौ अभ्यारण में ही बैठ कर मेयर गौतम सरदाना के साथ वहां पर उपस्थित अपनी ही पार्टी के समर्थकों से झोली पसार कर मात्र 36 हजार 500 रूपये एकत्रित किये और 700 के करीब गायों की मौत पर मुस्कराते हुए विधायक कमल गुप्ता व मेयर गौतम सरदाना ने फोटो खिंचवाई जो एक बेहद शर्मनाक घटना है! जरा गंभीरता से सोचें तो यह इन गायों की दर्दनाक मौत का एक किस्म से मजाक उड़ाया गया है! जनता को मूर्ख बनाते हुए दान लेने के लिए झोली पसारी गई जब कि हिसार में संचालित की जाने वाली कई गौशालाओं में दानियों के द्वारा करोड़ों रुपया दान में दिया जा चुका है! इस से भाजपा सरकार के दिमाग के दिवालियेपन का पता लगता है कि जो विधायक व मेयर इन गायों की मौत पर ही झोली पसार कर केवल 36 हजार 500 रूपये इकठ्ठा कर रहा हो तो आप समझ सकते हैं कि वास्तव में ही ये 700 गाय भूख प्यास और ठंड से मरी हैं क्यों कि इन गायों के लिए सरकार से चारे व रखरखाव के लिए जो 10 करोड़ रुपया आया था उसे ये भाजपा के नेता डकार चुके हैं! इन गायों की मौत के बाद ही गौ सेवा आयोग ने बेशर्मी की सारी हदें तोड़ते हुए बड़ी मुश्किल से मात्र 5 लाख रूपये देने की बात कही है वो भी 700 गायों की मौत के बाद! इस से साबित होता है कि भाजपा सरकार खुद ही गायों की मौत के लिए पूरी-पूरी जिम्मेवार है व जितने भी गौ रक्षक बने हुए हैं वे सब केवल गायों की मौत के बाद मरी हुई गायों की खाल, हड्डियों व अन्य अंगों को बेचने का काम करते हैं व गौ तस्करों से मिलीभगत करके ये सभी हिंदू गौ रक्षक खुद ही गायों को बेमौत मार के हमेशा मुस्लिमों पर गाय के मांस बरामद होने के झूठे केस लगवाते रहते हैं!

हिसार के गौ अभ्यारण में भूख प्यास व ठंड की वजह से 700 के करीब गायों की मौत की खबरें प्रकाशित होने पर नगर निगम प्रशासन बौखला गया व गौ अभ्यारण में मीडिया प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया! इस बारे में निर्देश देने के लिए गौ अभ्यारण की दीवार पर निगम आयुक्त के आदेश पर 5 जगहों पर आदेश की पट्टिका लगा दी गई है! इसके अलावा गौ अभ्यारण में किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है! इन आदेशों के बाद गौ अभ्यारण के मुख्य गेट को भी अंदर से बंद कर दिया गया है ताकि कोई अंदर ना जा सके! पत्रकारों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की सोच रखने वाले अधिकारी और गौ अभ्यारण समिति के चेयरमैन व सदस्यों का ध्यान गौ अभ्यारण में गायों की हालात सुधारने की बजाय मीडिया कवरेज को रोकने में ज्यादा है!

हिसार के गौ अभ्यारण में 700 गायों की भूख प्यास व ठंड से हुई मौत की जांच के लिए गठित लाला लाजपतराय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) की कमेटी की रिपोर्ट में पशु चिकित्सिकों ने स्पष्ट तौर पर सीधा सीधा नगर निगम के द्वारा गौ अभ्यारण में गायों के रखरखाव का प्रबंधन गलत किये जाने पर नगर निगम को दोषी करार दिया है! इस रिपोर्ट के अनुसार गौ अभ्यारण में गलत प्रबंधन को दर्शाती हुई मुख्य तौर पर छह बड़ी कमियां बतायी गई हैं जिनमें पहली कमी यह पाई गई कि वहां बनाये गये शैलटर शैड की ऊंचाई काफी ज्यादा है! शैड के साइड में पर्दों की कमी की वजह से व शैड की ऊंचाई ज्यादा होने की वजह से ही गायों को शैड के अंदर ठंड ने जबरदस्त प्रभावित किया व ठंड से बचाव के लिए हीटर व अलाव जैसे प्रबंध भी नहीं किये गये! दूसरी कमी यह थी कि गायों के लिए पानी का प्रबंधन ठीक नहीं था! छोटे व बड़े दोनों प्रकार के पशुओं के लिए अलग-अलग पानी पीने की व्यवस्था होनी चाहिये थी जो कि वहां नहीं थी! तीसरी कमी थी कि पशुओं के पोस्टमॉर्टम के लिए कवर्ड किया हुआ स्थान नहीं था जिस से दूसरे पशुओं में संक्रमण फैल सकता है! चौथी कमी थी कि पशुओं के लिए कोई भी डाइट चार्ट नहीं था! पशुओं को प्रोटीन व पोषक तत्व मिले, इसके लिए कोई प्रबंध नहीं था! आपातकालीन दवाओं का भी प्रबंध नहीं था! पांचवीं कमी बड़ी भारी थी कि गौ अभ्यारण में सीवरेज व ड्रेनेज की कोई भी व्यवस्था तक नहीं थी! साफ-सफाई के अभाव में पशुओं को बैक्टीरियल या फंगस संक्रमण होने का खतरा बना हुआ है! गायों के शैलटर को रोजाना साफ करने की कोई व्यवस्था नहीं थी! छटी कमी आइसोलेशन की पाई गई! जब रोजाना गायें भूख प्यास व ठंड से बीमार होकर मर रही थी तो उन्हें स्वस्थ गायों से अलग क्यों नहीं रखा गया? यह एक बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह है! इस वजह से भी गायों के मरने की संख्या ज्यादा तादात में बढ़ती चली गई! गौ अभ्यारण प्रशासन को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए था मगर नगर निगम मेयर व विधायक तथा गौ अभ्यारण समिति के सभी सदस्यों ने इन गायों की मौत को एक साधारण तौर पर हल्के में लिया! हिसार के गौ अभ्यारण में भूख प्यास व ठंड से बीमार होकर मरने वाली गायों की संख्या के बारे में नगर निगम 529 गायों के मरने की बात कह रहा है मगर यह आंकड़ा बढ़ कर 700 के लगभग गायों की मौत का हो चुका है!

हिसार के इस गौ अभ्यारण की कमियों का एक राज और खुलकर सामने आया कि नगर निगम हिसार ने गौ अभ्यारण में कार्यरत पांच कर्मचारियों का अगस्त माह से लेकर अब तक पांच महीनों का वेतन ही नहीं दिया और ये पांच कर्मचारी बार बार निगम अधिकारीयों से जाकर मिले परंतु इन का कोई भी समाधान नहीं किया गया बल्कि इन पांच कर्मचारियों को 31 दिसंबर को हटा दिया गया! इसके लिए नगर निगम के मेयर व अधिकारी पूरे-पूरे जिम्मेवार हैं!

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