गब्बर इज बैक का डायलॉग संशय के घेरे में !

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 17 नवंबर। हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्रालय का कार्यभार संभालते ही अनिल विज ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि गब्बर इज बैक और उन्होंने कहा कि न मैं बदला हूं और ना ही बदलूंगा! उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि उन लोगों को जरूर बदल दूंगा जो काम के प्रति लापरवाह है!

हरियाणा में बढ़ते अपराध पर विज ने कहा कि मैं पहले सही से विभाग को समझूंगा और पुलिस का काम करने का तरीका देखूंगा व बढ़ते अपराध के मुद्दे पर बात करूंगा! आगे अफसरों व कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे या तो सुधर जायें नहीं तो वीआरएस लेकर घर बैठ जायें! गृह मंत्री ने कहा कि राज्य को नशा मुक्त बनाया जायेगा! स्वास्थ्य विभाग की कमियों को भी सुधारने की बात उन्होंने कही व साथ में कहा कि उनका शहरी विकास पर भी फोकस रहेगा! गृह मंत्रालय संभालते ही अनिल विज ने कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था को ठीक करने में वे कोई कमी नहीं छोड़ेगें! प्रदेश को अपराध मुक्त करने के लिए पुलिस की छवि को और बेहतर किया जायेगा! ढीले अफसरों को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि अपना बोरिया बिस्तर बाँधकर रखें व साथ ही जूते के तस्में भी कस कर रखें!

अनिल विज अब भी चंडीगढ़ में कोठी नहीं ले रहे और वे अंबाला छावनी के अपने घर में रोजाना शाम को चंडीगढ़ सें आ जाते हैं व रोजाना सुबह लोगों के बीच बैठकर ही चाय पीते हैं! अब यहां पर एक सवाल यह भी उठता है कि अपनी कार्यशैली की मजबूती के कारण चर्चाओं में रहने वाले अनिल विज पर पिछली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए स्वास्थ्य विभाग में हुए बड़े भारी घोटालों के भी आरोप लगते रहे हैं! इसके पीछे के कारणों पर अगर देखा जाये तो मालूम पड़ता है कि कोई न कोई कारण तो रहा है कि अनिल विज जैसा इंसान प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को जनता के लिए सस्ती, मजबूत व सुचारु रूप से उपलब्ध नहीं करवा पाया! वर्ष 2014 में जब ये स्वास्थ्य मंत्री बने तो गुरुग्राम के सिविल अस्पताल में अचानक दौरा कर के वहां की छत पर चढ़ कर पानी की टंकी चैक की व टंकी में कीड़े मकोड़े पाये जाने पर अधिकारी निलंबित किये परंतु धीरे-धीरे जैसे सरकार का समय बीतता गया तो अनिल विज के भी केवल डायलॉग ही रह गये व स्वास्थ्य सेवाएं चौपट होती चली गई! पिछले पांच वर्षों में हरियाणा के सरकारी अस्पतालों की स्थिति बदतर से भी बदतर होती चली गई व निजी अस्पतालों की दुकानदारी बढ़ती चली गई! मरीजों को महंगा इलाज करवाने के लिए मजबूर होना पड़ा और इंश्योरेंस कंपनियों व निजी अस्पतालों की मिलीभगत से खुलेआम मरीजों को लूटा जाने लगा! पिछली भाजपा सरकार में गुरुग्राम के कई बड़े-बड़े निजी अस्पतालों में महंगे इलाज के बावजूद भी लापरवाही के चलते सैंकड़ों मरीजों की मृत्यु हुई! परंतु इन निजी अस्पतालों पर हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग ने कोई नकेल नहीं कसी व सरकारी अस्पतालों का कोई सुधार नहीं किया!

हरियाणा के वर्तमान उपमुख्यमंत्री व तत्कालीन सासंद दुष्यंत चौटाला ने जब हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रूपये की दवा व उपकरण की खरीद के मामले में किये गये एक बड़े घोटाले की पोल खोली तो उस वक्त स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने 3 अप्रैल 2018 को एक पत्रकार वार्ता में दुष्यंत चौटाला को नशेड़ी कहते हुए उन्हें नशा मुक्ति केंद्र से इलाज करवाने की सलाह दी थी! दुष्यंत ने इस के बाद हिसार अदालत में अनिल विज के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करवाया तथा अब इस केस में 15 नवंबर तारीख थी जिस पर दुष्यंत चौटाला ने हाजरी माफी का आवेदन लगवाया व उनके वकील पी.के. संधीर के अनुसार इस केस में अगली तारीख एक फरवरी है!

इस सारे मामले में जब मजदूर नेता राजेंद्र सरोहा से बात की गई तो उन्होंने अनिल विज पर व्यंग कसते हुए कहा कि गब्बर इज बैक का डायलॉग तो केवल फिल्म में ही ठीक लगता है क्यों कि वहां गब्बर को एक डाकू के रूप में दिखाया गया है जब कि अनिल विज पर तो अब प्रदेश का गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य व स्थानीय निकाय जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय है! उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि यदि अनिल विज अपने आप को गब्बर कहते हैं तो जनता तो ये समझेगी कि एक गृहमंत्री गब्बर के रूप में डाकू बन कर लूटने आया है! आगे उन्होंने कहा कि अनिल विज के इस प्रकार के बचकाने डायलॉग ही कहीं पर अनिल विज के लिए अग्नि परीक्षा के रूप में साबित ना हो जाये और उन से पुलिस प्रशासन, नगर निगम प्रशासन व स्वास्थ्य सेवाएं भी ना संभल सके! इस प्रकार वे मात्र डायलॉग और नौटंकी के मंत्री बन कर रह जायेंगे!

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