कौशल विकास और स्टार्टअप पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 17 मार्च। गुरुग्राम के सेक्टर 40 स्थित एमडीयू सेंटर फॉर प्रोफेशनल एंड अलाइड स्टडीज के सेंटर पर एक दो दिवसीय कौशल विकास और स्टार्टअप के विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया! इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम दिवस मुख्य अतिथि के तौर पर हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के चेयरपर्सन प्रोफेसर बी. के.कुठियाला ने संबोधित करते हुए कृषि और संबंधित क्षेत्रों से कौशल विकास के बारे में कहा कि किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की जरूरत है! किसानों को न केवल खेती के बारे में प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है बल्कि उन्हें उधमी के रूप में प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है ताकि किसान को अपनी फसल से अच्छी आमदन हो सके! किसान अपने योगदान के लिए सम्मान के पात्र हैं और यह प्रयास न केवल किसानों को प्रेरित करने के लिए बल्कि हमारी युवा पीढ़ी को समाज और अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र के योगदान के लिए प्रेरित करने के लिए भी किया जाना चाहिये! प्रोफेसर बी. के.कुठियाला ने आगे बताया कि छात्रों के दिमाग को आकार देने के लिए शिक्षकों की पूरी जिम्मेदारी है और शिक्षकों को छात्रों को प्रशिक्षित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए! शिक्षण का उद्वेश्य केवल स्नातक की बजाय कुशल स्नातक का उत्पादन होना चाहिए!

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ की गई! सेंटर की निदेशिका प्रो.संतोष नांदल ने अतिथियों का स्वागत किया तथा कांफ्रेंस के विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की आय को दोगुना करने के लिए उन्हें सरंक्षण और पैकेजिंग कौशल तथा विपणन कौशल पर प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है! इसके अलावा उपज के साथ उत्पाद के पोषण मूल्य को बढ़ाने के लिए भी उन्हें प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है! उन्होंने कहा कि यह तभी संभव है जब किसान कृषि के महत्व को एक उधोग के रूप में पहचानना शुरू करेंगे और इस क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ायेंगे! सम्मेलन की आयोजन सचिव डॉ.सुनील देवी खरब ने बताया कि सम्मेलन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आये शिक्षक व शोधार्थी अपने शोध को प्रस्तुत करेंगे! इस अवसर पर सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र चंडीगढ़ से अवतार सिंह मुख्य तौर पर उपस्थित रहे तथा सेंटर के शिक्षक,छात्र एवं प्रतिभागी भी उपस्थित रहे!

इस दो दिवसीय कांफ्रेंस के दूसरे दिन अपने शोधपत्र में शोधार्थी ललित ने मूल्य स्थिरता के लिए मार्केट इंटेलिजेंस सिस्टम की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया और किसान को टेक्नोक्रेट बनाने की आवश्यकता पर विचार दिया! वहीं शोधार्थी मनीष ने किसानों की सामाजिक व आर्थिक विषमता को कम करने तथा शोधार्थी अपूर्वा ने किसानों के लिए राष्ट्रीय संगठन प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया! सूचना प्रौधोगिकी एवं क़ानूनी सलाहकार शमशेर सिंह ने गावों में पंचायती भूमि के प्रभावी उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया और कृषि भूमि पर मल्टी टॉस्किंग के लिए आग्रह किया! इस अवसर पर डॉ.प्रतिभा भारद्वाज,डॉ.सोमलता शर्मा, डॉ.सीमा बसवाना, डॉ.प्रीति, डॉ.कैलाश कुमार, डॉ.सुरेंद्र नारा व डॉ.अनुपम कुरलवाल ने विभिन्न सत्रों में अध्यक्षता की! सम्मेलन की आयोजन सचिव डॉ.सुनील देवी खरब ने विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में आठ तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न हिस्सों से आये शिक्षकों व शोधार्थियों ने 84 शोधपत्र प्रस्तुत किये!

इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य वक्ता के तौर पर सेंटर की निदेशिका प्रो.संतोष नांदल ने संबोधित करते हुए कहा कि कृषि उपज की मांग शहरों में लगातार बढ़ रही है! उस के बावजूद कृषि गतिविधियों में किसानों की रूचि घट गई है! जिसे कृषि क्षेत्र में रोजगार की घटती संख्या से देखा जा सकता है! इसका कारण कृषि में निम्न स्तर की आय को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है! कृषि में रोजगार बढ़ाने के लिए समर्थन मूल्य के अलावा किसानों के लिए न्यूनतम मजदूरी को सक्षम करने वाले कानून की आवश्यकता है!

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