कोरोना भगाने के लिए काले जादू की शरण में प्रधानमंत्री !

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गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 3 अप्रैल। कोरोना वायरस जैसी महामारी की चपेट में आये भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब कोरोना वायरस का इलाज काले जादू या तंत्र मंत्र की क्रिया से करने के लिए देश की जनता को संदेश देकर सख्ती से लागू करवाने का गैरकानूनी प्रयास कर रहे हैं! 22 मार्च को जनता कफ्र्यू लगा कर शाम 5 बजे पूरे देश में घंटें घडिय़ाल बजवाये गये व काफी जगह भाजपा के नेताओं ने ही सोशल डिस्टेंस के आदेश की धज्जियां उड़ाई और उस के बाद पूरे देश में अचानक ही लॉक डाउन 21 दिन का घोषित कर दिया गया! घंटें घडिय़ाल बजवाने के बाद तो कोरोना ठीक होना चाहिये था परंतु देश में कोरोना के मरीजों की संख्या धड़ाधड़ बढऩे लगी!

यह एक अलग बात है कि कोरोना के संक्रमित मरीजों के बढ़ाये गये आंकड़ें सरकार के द्वारा बड़ी भारी आर्थिक मदद लेने का एक महज ड्रामा है या लोगों को कोई वास्तव में कोरोना का वायरस है! जनता कफ्र्यू, घंटें घडिय़ाल बजवाने व लॉक डाउन की नौटंकी के बाद अब प्रधानमंत्री ने एक नई अजीबोगरीब नौटंकी 5 अप्रैल के लिए घोषित की है! प्रधानमंत्री ने आज प्रात: 9 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन में जनता के लिए आदेश दिया कि 5 अप्रैल को रात्री 9 बजे सभी लोग 9 मिनट के लिए सारी लाइटें बंद कर के खड़े हो जायें व मोमबत्ती या दीया या टॉर्च जलायें! काले जादू या लाल किताब के फार्मूले के इस्तेमाल से अब हमारे देश के प्रधानमंत्री कोरोना को ठीक करना चाहते हैं! माननीय प्रधानमंत्री की बुद्धि पर तरस आता है कि जब पूरे देश का गरीब मजदूर एक एक रोटी को तरस रहा हो और व्यापारी, किसान व कामगार लोगों के घरों में रोटियों के लाले पड़े हों तो ऐसे वक्त में क्या हमारे प्रधानमंत्री दीयों व मोमबत्तियों को जलाकर दीवाली मनाते हुए उन करोड़ों गरीबों के दिलों को जला कर भस्म कर देना चाहते हैं?

पूरे देश की जनता में जिस वक्त कोरोना वायरस के संक्रमण का जबरदस्त भय हो व लॉक डाउन की वजह से कई लाख करोड़ रूपये का देश के व्यापर का आर्थिक नुक्सान हो चुका हो तो उस वक्त आये हुए गंभीर संकट को केवल व्यवहारिक रूप से अपनाई जाने वाली रीति व नीति ही हमेशा काम में आती है ना कि बचकानी जादूगरी! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज प्रात: 9 बजे राष्ट्र की जनता के नाम जो संदेश दिया है वह बिलकुल गैरजि़म्मेवाराना है! प्रधानमंत्री का उत्तरदायित्व बनता था कि अपने इस संबोधन में कोरोना वायरस के ईलाज व मरीजों के उपचार के आंकड़ों के बारे में व लोगों के इस लॉक डाउन के तहत हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए व्यापारियों,किसानों व कामगार मजदूर लोगों को दिये जाने वाली राहत के बारे में विस्तार से बताया जाता! परंतु सिवाय जादूगरी की बातों के प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस पीडि़तों व लॉक डाउन से पीडि़त लोगों को कोई राहत नहीं दी! प्रधानमंत्री अपनी जादूगरी के अलग-अलग रंग बदलते हैं! मुख्यमंत्रियों की मींटिंग में बोलते हैं कि कोरोना हॉट स्पॉट का युद्ध स्तर पर पता लगायें सभी राज्य और फैलने से रोकें! दूसरी तरफ जनता के नाम संबोधन में जादूगरी व तंत्र मंत्र की बात करते हैं! देश के स्वास्थ्यमंत्री डा. हर्षवर्धन कहते हैं कि लॉक डाउन खत्म होने तक दस हजार हो सकती है कोरोना पीडि़तों की संख्या! यह क्या माजरा है! इसका मतलब यह भी हो सकता है कि कोरोना पीडि़तों की संख्या कहीं फर्जी तौर पर बढ़ाई जा रही हो! साधारण खांसी जुकाम या मौसमी वायरल के मरीज कोरोना पीडि़त बता कर दाखिल किये जा रहे हों! ऐसा भी हो सकता है!

हरियाणा में कुल 35 मरीजों में 13 ठीक हो चुके हैं! प्रदेश में कल तक 1102 सैंपल की जांच की गई! इसमें 885 सैंपल नेगेटिव और 35 सैंपल पॉजटिव आये जब कि 182 सैंपल की रिपोर्ट आनी बाकी है! गुरुग्राम में कल तक 587 कुल मामले थे जिन में 533 नेगेटिव पाये गये व एक पॉजटिव और 53 की रिपोर्ट आनी बाकी है! फरीदाबाद में कल तक 153 कुल मामले थे जिन में 103 नेगेटिव पाये गये व 6 पॉजटिव और 44 की रिपोर्ट आनी बाकी है! अभी तक कोरोना वायरस के कारण हमारे देश में जो मृत्यु होने का आंकड़ा बताया जा रहा है उस आंकड़े में यह भी संभावना लगती है कि कुछ बुजुर्ग लोग या अन्य लोग शुगर,ह्रदय रोग और ब्लड प्रेशर के रोगी थे या पहले कभी वें स्वाइन फ्लू या चिकनगुनिया या डेंगू रोग से पीडि़त रहे थे, ऐसे लोग ही कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हों! विदेशों में भी ऐसा ही देखने को मिला है कि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में 97 प्रतिशत पहले से किसी न किसी रोग से ग्रस्त हैं!

भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के कुल आंकड़े में से 98 फीसदी मामलों में संक्रमण हल्का (माइल्ड ) है! हमारे देश में इस वक्त कोरोना वायरस के नाम पर एक बहुत बड़ा खौफनाक दृश्य खुद केंद्रीय सरकार व प्रधानमंत्री के द्वारा बना दिया गया! उसके कई उदाहरण हमारे सामने आ चुके हैं! इस कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक बीमारियां हमारे देश में पहले भी आ चुकी हैं परंतु इस प्रकार की लॉक डाउन व नौटंकी का दृश्य कभी नहीं देखा गया! वर्ष 2018 में उतर प्रदेश में जापानी बुखार से सैंकड़ों बच्चों की मृत्यु हुई व जून 2019 में बिहार में चमकी बुखार से भी सैंकड़ों बच्चों की मृत्यु हुई! उस समय भी हमारी मेडिकल व्यवस्थाओं में काफी खामियां रही परंतु हमारे देश के प्रधानमंत्री ने इन दोनों घटनाओं से कोई सबक नहीं सीखा उलटे इस वक्त कोरोना वायरस के ईलाज के लिए उलटे पुल्टे तंत्र क्रिया के उपाय बताने लगे!

इस वक्त हमारे देश की जनता का प्रधानमंत्री की बातों पर विश्वास खत्म होता जा रहा है! आज देश की जनता को यह तक नहीं बताया जा रहा कि कोरोना वायरस के सैंकड़ों की संख्या में जो ठीक हो रहे हैं उन्हें कौन सी दवाई से ठीक किया जा रहा है! संक्रमित लोगों की जांच के लिए क्या सिस्टम है या 14 दिन तक किस प्रकार रखा जा रहा है इस बात का खुलासा जनता को नहीं दिया जा रहा! इन सब कारणों से जनता जबरदस्त भयभीत है! इस सारे भय के वातावरण में तो अब डॉक्टरों में खौफ छाया हुआ है! हरियाणा में नियुक्ति के बाद नवचयनित डॉक्टर अपनी ड्यूटी ज्वाइन नहीं कर रहे! 380 में से केवल 71 डॉक्टरों ने ही ड्यूटी ज्वाइन की है! दूसरी तरफ दिल्ली के हिंदू रॉव के डॉक्टरों का आरोप है कि कोरोना से बचने के लिए उन्हें घटिया क्वालिटी की ड्रेस दी गई है! उनकी शिकायत पर सुनवाई ना होने की वजह से कुछ डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है!

कोरोना वायरस का इलाज करने वाले डॉक्टर आइसोलेट पीपीई किट पहनने के बाद 8-8 घंटे तक पानी तक नहीं पीते! ऐसे में डॉक्टरों के लिए भी पूरा खतरा बना हुआ है! देश में लॉक डाउन के चलते घरेलू हिंसा के भी लगभग 69 मामले आ गये हैं! दूसरी तरफ होम क्वारेंटाइन से बढऩे वाली डिप्रेशन के मामले भी काफी गंभीर होते जा रहे हैं! घरों में आइसोलेशन में रखे जाने वाले लोगों की जिंदगी केवल एक कमरे में सिमट कर रह जाती है और वो व्यक्ति पागलों जैसी अवस्था में जा सकता है! कुछ लोगों की 14 दिन के बाद भी होम आइसोलेशन बढ़ा दी जा रही है जो कि उस व्यक्ति की मानसिक अवस्था काफी हद तक खराब होने के संकेत हैं! इन सभी कारणों के चलते हमारे देश के प्रधानमंत्री गंभीरता से लॉक डाउन व होम आइसोलेशन से पैदा हुई जनता की गंभीर समस्याओं को जल्द से जल्द हल करें! तंत्र मंत्र के उपायों के माध्यम से कभी थाली बजवाने या कभी मोमबत्ती जलवाने के ड्रामे ना किये जायें!

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