किसान को फांसी के फंदे तक पहुंचा रही केन्द्र सरकार : अम्बावता

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फरीदाबाद। भारतीय किसान यूनीयन (अ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ. ऋषिपाल अम्बावता ने केन्द्र की भाजपा सरकार को आडे हाथ लेते हुए कहा कि देश के अन्नदाता किसान वर्ग को भारत सरकार ने अपने हाल पर मरने के लिए छोड दिया है। देश में लॉकडाउन चल रहा है और अन्नदाता पैसे-पैसे को मोहताज है। देश में राज कर रही भाजपा की केन्द्र और राज्यों की सरकारें केवल उद्योगपतियों की पोषक बनकर काम कर रही हैं। केन्द्र सरकार ने देश का धन लूट रहे उद्योगपतियों से कर्ज बसूलने की बजाय 68 हजार करोड रूपये बट्टे खाते में डाल दिया, जबकि किसान पर किसी बैंक के 5 सौ रूपये बकाया रह जाते हैं, तो बैंककर्मी उनकी भैंस-बकरियों तक को नीलाम करके पैसा बसूलते हैं। उन्होने कहा देश में भाजपा सरकार की नीति गरीब मजदूर और किसान विरोधी है। हालात यह है कि केन्द्र सरकार ही अपनी किसान विरोधी नितीयों से किसान को फांसी के फंदे तक पहुंचाने का काम कर रही है।

श्री अम्बावता ने 5 अप्रैल से सोशल मीडिया के माध्यम से किसानों को जागरूक करने और सरकार के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करने के लिए किसान कर्जा मुक्ति अभियान ऑनलाईन शुरू किया। उन्होने लॉकडाउन में अपने टयूटर हैंडल, फेसबुक और व्हटसएप के माध्यम से किसानों तक अपनी बात पहुंचाई, और एक होकर देश के हर किसान तक अपनी आवाज पहुंचाने की अपील की। उन्होने बताया इस अभियान के शुरू होने के बाद मात्र चंद घंटों में ढेड लाख किसानों तक उनकी बात पहुंच गई। उन्होने कहा बेशक आज कोरोना महामारी से लगे लॉकडाउन की बजह से किसानों के सामने अनेक संकंट हैं, मगर घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होने किसानों को आश्वासन दिया कि भाकियू आखरी दम तक किसानों के हकों की लडाई लडती रहेगी।

श्री अम्बावता ने कहा देश में किसानों की हालत बहुत खराब है, जबकि केन्द्र की भाजपा सरकार और राज्यों की भाजपा सरकारेंं किसानों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही हैं। किसान का माल मंडियों में कौडियों के भाव खरीदा जा रहा है, और आढती लॉकडाउन का फायदा उठाकर दो रूपये किलो की सब्जी को 20 रूपये किलो में बेच रहे हैं। उन्होने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा यदि जल्द सरकार ने बिचौलियों पर अंकुश नहीं लगाया तो देश का किसान लॉकडाउन खुलते ही सडक पर आ जाएगा। उन्होने किसानों की पांच मांगों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का किसान तभी खुशहाल होगा। जब पूरे देश का किसान कर्जा मुक्त होगा। किसानों को डीजल पर सब्सीडी मिले। बुढापा पैंशन 5 हजार मिले, किसान आयोग का गठन हो। स्वामी नाथन रिपोर्ट सी-2 के आधार पर लागू हो, और अब लॉकडाउन में किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए केन्द्र सरकार आर्थिक पैकेज दे। उन्होने कहा देश में किसानों के सब्र का बांध टूट रहा है, यदि नरेन्द्र मोदी की सरकार समय पर नहीं जागी, तो वह दिन दूर नहीं जब भाजपा को देश का किसान सत्ता उखाड़ फेंकेगा।

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