कारगिल विजय दिवस की 23वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में शहीद स्मारक सेक्टर-12 में समारोह का आयोजन किया गया

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फरीदाबाद, 26 जुलाई। “शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले, बस एक यही निशां बाकी रहेगा” को सार्थक रूप देते हुए कारगिल विजय दिवस की 23वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में शहीद स्मारक सेक्टर-12 समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपायुक्त जितेन्द्र यादव ने बतौर मुख्य अतिथि और भाजपा के जिला अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने शिरकत की।

विजय दिवस समारोह की अध्यक्षता बिग्रेडियर एसएन सेतिया ने की। कारगिल विजय दिवस समारोह में बड़ी संख्या में भूतपूर्व सैनिकों ने शिरकत की। इस मौके पर कारगिल युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों को फूल अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई तथा उनके शौर्य वीरता व अदम्य साहस को सराह कर शत शत नमन किया गया।

डीसी जितेन्द्र यादव ने शहीद स्मारक में प्रर्दशनी हॉल को भी देखा जिसमें हरियाणा के वीर शहीद सैनिकों की गाथा तथा अब तक हुए यद्रों के इतिहास को बताया गया है।

उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस घुसपैठ करने वाले पाकिस्तानी सैनिकों पर भारतीय सैनिकों की जीत के उपलक्ष्य में आज 26 जुलाई पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि युद्ध कभी अच्छा नहीं होता। इससे दोनों तरफ बड़ा नुकसान होता है, हजारों सैनिक शहीद हो जाते हैं। भारत एक शांतिप्रिय देश है जो युद्ध में विश्वास नहीं करता है। भारतीय सेना हमेशा विदेशी ताकतों से देश की रक्षा करती है, मातृभूमि के लिए बलिदान देती है और हमें गौरवान्वित करती है।

भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने कहा कि आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं ये सब इन शहीद सैनिकों की वजह से ले रहे है। जो दुश्मन के मंसूबों को कभी सफल नहीं होने देते बेशक बलिदान ही क्यों ना देना पड़े।

कारगिल विजय दिवस समारोह के अंत में वीर नारियों/वीरांगनाओं को पुरस्कृत किया गया तथा जय जवान, जय भारत के नारे के साथ समारोह का समापन किया गया।

आपको बता दें कारगिल युद्ध को 23 साल हो चुके हैं। आज ही के दिन भारत को इस युद्ध में विजय मिली थी। जिस इलाके में ये युद्ध लड़ा गया। वहां सर्दियों में -50 तक तापमान चला जाता है। सर्दियों के मौसम में इन इलाकों को खाली कर दिया जाता था। इसी का फायदा उठाकर पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की गई। इस घुसपैठ में पाकिस्तान की सेना ने भी मदद की।

3 मई 1999 ये वो तारीख, है जब हिंदुस्तान को इस घुसपैठ का पता चला। दरअसल कुछ स्थानीय चरवाहों ने भारतीय सेना के लोगों को इसके बारे में बताया। इसके बाद शुरू हुआ तनाव और संघर्ष 84 दिन चला। उन 84 दिन बाद 26 जुलाई 1999 को भारत को जीत मिली थी।

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